13 अगस्त 2028 को ऋषिकेश का पंचांग

रविवार, 13 अगस्त 2028, ऋषिकेश, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 13 अगस्त 2028 को ऋषिकेश में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (05:37, 14 अग॰ तक), नक्षत्र भरणी (16:38 तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 05:43 पर और सूर्यास्त 18:59 पर है। राहुकाल 17:20 से 18:59 तक है।

दिन और रात
दिन 05:43 – 18:59
रात 05:43 तक
तिथि
अष्टमी, 05:37 तक
नक्षत्र
भरणी, 16:38 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

13 अगस्त 2028 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 05:37, 14 अग॰ तक
कृष्ण नवमी 05:47, 15 अग॰ तक
नक्षत्र
भरणी 16:38 तक
कृत्तिका 17:51, 14 अग॰ तक
योग
वृद्धि 22:01 तक
ध्रुव 21:22, 14 अग॰ तक
करण
बालव 17:15 तक
कौलव 05:37, 14 अग॰ तक
तैतिल 17:48, 14 अग॰ तक
चंद्र राशि
मेष 23:00 तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:43
सूर्यास्त
18:59
चंद्रोदय
23:12
चंद्रास्त
12:41
दिनमान
13h 17m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:17 – 05:00
अभिजीत मुहूर्त
11:54 – 12:47

अशुभ समय

राहुकाल
17:20 – 18:59
यमगंड
12:21 – 14:01
गुलिक काल
15:40 – 17:20

13 अगस्त 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:43 – 07:22टालें
चर07:22 – 09:02सामान्य
लाभ09:02 – 10:41शुभ
अमृत10:41 – 12:21शुभ
काल12:21 – 14:01टालें
शुभ14:01 – 15:40शुभ
रोग15:40 – 17:20टालें
उद्वेग17:20 – 18:59टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:59 – 20:20शुभ
अमृत20:20 – 21:40शुभ
चर21:40 – 23:01सामान्य
रोग23:01 – 00:21टालें
काल00:21 – 01:42टालें
लाभ01:42 – 03:02शुभ
उद्वेग03:02 – 04:23टालें
शुभ04:23 – 05:43शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:4306:49दिन
शुक्र06:4907:55दिन
बुध07:5509:02दिन
चंद्र09:0210:08दिन
शनि10:0811:15दिन
गुरु11:1512:21दिन
मंगल12:2113:27दिन
सूर्य13:2714:34दिन
शुक्र14:3415:40दिन
बुध15:4016:47दिन
चंद्र16:4717:53दिन
शनि17:5318:59दिन
गुरु18:5919:53रात
मंगल19:5320:47रात
सूर्य20:4721:40रात
शुक्र21:4022:34रात
बुध22:3423:28रात
चंद्र23:2800:21रात
शनि00:2101:15रात
गुरु01:1502:09रात
मंगल02:0903:02रात
सूर्य03:0203:56रात
शुक्र03:5604:49रात
बुध04:4905:43रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 अग॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 अग॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 अग॰ 2028सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
18 अग॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 अग॰ 2028भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
23 अग॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
30 अग॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 सित॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 सित॰ 2028भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
8 सित॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां ऋषिकेश में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2568° (लाहिड़ी)। समय ऋषिकेश (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।