28 दिसंबर 2028 को ऋषिकेश का पंचांग

गुरुवार, 28 दिसंबर 2028, ऋषिकेश, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 28 दिसंबर 2028 को ऋषिकेश में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (23:21 तक), नक्षत्र कृत्तिका (04:29, 29 दिस॰ तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 07:11 पर और सूर्यास्त 17:25 पर है। राहुकाल 13:35 से 14:51 तक है।

दिन और रात
दिन 07:11 – 17:25
रात 07:12 तक
तिथि
द्वादशी, 23:21 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
कृत्तिका, 04:29 तक
रोहिणी
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 दिसंबर 2028 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 23:21 तक
शुक्ल त्रयोदशी 23:36, 29 दिस॰ तक
नक्षत्र
कृत्तिका 04:29, 29 दिस॰ तक
रोहिणी 05:10, 30 दिस॰ तक
योग
साध्य 04:13, 29 दिस॰ तक
शुभ 03:08, 30 दिस॰ तक
करण
बव 10:59 तक
बालव 23:21 तक
कौलव 11:34, 29 दिस॰ तक
चंद्र राशि
मेष 09:34 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:11
सूर्यास्त
17:25
चंद्रोदय
14:24
चंद्रास्त
03:53
दिनमान
10h 13m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:21 – 06:16
अभिजीत मुहूर्त
11:58 – 12:38

अशुभ समय

राहुकाल
13:35 – 14:51
यमगंड
07:11 – 08:28
गुलिक काल
09:45 – 11:01

28 दिसंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ07:11 – 08:28शुभ
रोग08:28 – 09:45टालें
उद्वेग09:45 – 11:01टालें
चर11:01 – 12:18सामान्य
लाभ12:18 – 13:35शुभ
अमृत13:35 – 14:51शुभ
काल14:51 – 16:08टालें
शुभ16:08 – 17:25शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:25 – 19:08शुभ
चर19:08 – 20:52सामान्य
रोग20:52 – 22:35टालें
काल22:35 – 00:18टालें
लाभ00:18 – 02:02शुभ
उद्वेग02:02 – 03:45टालें
शुभ03:45 – 05:28शुभ
अमृत05:28 – 07:12शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु07:1108:02दिन
मंगल08:0208:54दिन
सूर्य08:5409:45दिन
शुक्र09:4510:36दिन
बुध10:3611:27दिन
चंद्र11:2712:18दिन
शनि12:1813:09दिन
गुरु13:0914:00दिन
मंगल14:0014:51दिन
सूर्य14:5115:43दिन
शुक्र15:4316:34दिन
बुध16:3417:25दिन
चंद्र17:2518:34रात
शनि18:3419:43रात
गुरु19:4320:52रात
मंगल20:5222:00रात
सूर्य22:0023:09रात
शुक्र23:0900:18रात
बुध00:1801:27रात
चंद्र01:2702:36रात
शनि02:3603:45रात
गुरु03:4504:54रात
मंगल04:5406:03रात
सूर्य06:0307:12रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 दिस॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
31 दिस॰ 2028पौष पूर्णिमापूर्णिमा
4 जन॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 जन॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 जन॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 जन॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 जन॰ 2029माघ अमावस्याअमावस्या
14 जन॰ 2029मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
18 जन॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
26 जन॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां ऋषिकेश में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2620° (लाहिड़ी)। समय ऋषिकेश (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।