27 मार्च 2025 को रियाद का पंचांग

गुरुवार, 27 मार्च 2025, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

गुरुवार, 27 मार्च 2025 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (20:33 तक), नक्षत्र शतभिषा (22:03 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 05:49 पर और सूर्यास्त 18:07 पर है। राहुकाल 13:30 से 15:02 तक है।

दिन और रात
दिन 05:49 – 18:07
रात 05:48 तक
तिथि
त्रयोदशी, 20:33 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
शतभिषा, 22:03 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 मार्च 2025 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 20:33 तक
कृष्ण चतुर्दशी 17:25, 28 मार्च तक
नक्षत्र
शतभिषा 22:03 तक
पूर्वा भाद्रपद 19:39, 28 मार्च तक
योग
साध्य 06:54 तक
शुभ 03:26, 28 मार्च तक
शुक्ल 23:36, 28 मार्च तक
करण
गर 09:57 तक
वणिज 20:33 तक
विष्टि (भद्रा) 07:02, 28 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमीन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:49
सूर्यास्त
18:07
चंद्रोदय
04:22
चंद्रास्त
16:05
दिनमान
12h 17m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:16 – 05:03
अभिजीत मुहूर्त
11:34 – 12:23

अशुभ समय

राहुकाल
13:30 – 15:02
यमगंड
05:49 – 07:22
गुलिक काल
08:54 – 10:26

27 मार्च 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:49 – 07:22शुभ
रोग07:22 – 08:54टालें
उद्वेग08:54 – 10:26टालें
चर10:26 – 11:58सामान्य
लाभ11:58 – 13:30शुभ
अमृत13:30 – 15:02शुभ
काल15:02 – 16:35टालें
शुभ16:35 – 18:07शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:07 – 19:34शुभ
चर19:34 – 21:02सामान्य
रोग21:02 – 22:30टालें
काल22:30 – 23:58टालें
लाभ23:58 – 01:25शुभ
उद्वेग01:25 – 02:53टालें
शुभ02:53 – 04:21शुभ
अमृत04:21 – 05:48शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:4906:51दिन
मंगल06:5107:52दिन
सूर्य07:5208:54दिन
शुक्र08:5409:55दिन
बुध09:5510:57दिन
चंद्र10:5711:58दिन
शनि11:5813:00दिन
गुरु13:0014:01दिन
मंगल14:0115:02दिन
सूर्य15:0216:04दिन
शुक्र16:0417:05दिन
बुध17:0518:07दिन
चंद्र18:0719:05रात
शनि19:0520:04रात
गुरु20:0421:02रात
मंगल21:0222:01रात
सूर्य22:0122:59रात
शुक्र22:5923:58रात
बुध23:5800:56रात
चंद्र00:5601:55रात
शनि01:5502:53रात
गुरु02:5303:51रात
मंगल03:5104:50रात
सूर्य04:5005:48रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 मार्च 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 मार्च 2025चैत्र अमावस्याअमावस्या
1 अप्रैल 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 अप्रैल 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 अप्रैल 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 अप्रैल 2025चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
14 अप्रैल 2025मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
17 अप्रैल 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 अप्रैल 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 अप्रैल 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2096° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।