11 सितंबर 2025 को रियाद का पंचांग

गुरुवार, 11 सितंबर 2025, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

गुरुवार, 11 सितंबर 2025 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्थी (10:16 तक), नक्षत्र अश्विनी (11:28 तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 05:37 पर और सूर्यास्त 18:01 पर है। राहुकाल 13:22 से 14:55 तक है।

दिन और रात
दिन 05:37 – 18:01
रात 05:38 तक
तिथि
चतुर्थी, 10:16 तक
पंचमी
नक्षत्र
अश्विनी, 11:28 तक
भरणी
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 सितंबर 2025 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 10:16 तक
कृष्ण पंचमी 07:29, 12 सित॰ तक
नक्षत्र
भरणी 09:28, 12 सित॰ तक
योग
ध्रुव 14:34 तक
व्याघातअशुभ 11:13, 12 सित॰ तक
करण
बालव 10:16 तक
कौलव 20:51 तक
तैतिल 07:29, 12 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:37
सूर्यास्त
18:01
चंद्रोदय
20:28
चंद्रास्त
09:13
दिनमान
12h 23m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:05 – 04:51
अभिजीत मुहूर्त
11:24 – 12:14

अशुभ समय

राहुकाल
13:22 – 14:55
यमगंड
05:37 – 07:10
गुलिक काल
08:43 – 10:16

11 सितंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:37 – 07:10शुभ
रोग07:10 – 08:43टालें
उद्वेग08:43 – 10:16टालें
चर10:16 – 11:49सामान्य
लाभ11:49 – 13:22शुभ
अमृत13:22 – 14:55शुभ
काल14:55 – 16:28टालें
शुभ16:28 – 18:01शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:01 – 19:28शुभ
चर19:28 – 20:55सामान्य
रोग20:55 – 22:22टालें
काल22:22 – 23:49टालें
लाभ23:49 – 01:16शुभ
उद्वेग01:16 – 02:43टालें
शुभ02:43 – 04:11शुभ
अमृत04:11 – 05:38शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:3706:39दिन
मंगल06:3907:41दिन
सूर्य07:4108:43दिन
शुक्र08:4309:45दिन
बुध09:4510:47दिन
चंद्र10:4711:49दिन
शनि11:4912:51दिन
गुरु12:5113:53दिन
मंगल13:5314:55दिन
सूर्य14:5515:57दिन
शुक्र15:5716:59दिन
बुध16:5918:01दिन
चंद्र18:0118:59रात
शनि18:5919:57रात
गुरु19:5720:55रात
मंगल20:5521:53रात
सूर्य21:5322:51रात
शुक्र22:5123:49रात
बुध23:4900:47रात
चंद्र00:4701:45रात
शनि01:4502:43रात
गुरु02:4303:42रात
मंगल03:4204:40रात
सूर्य04:4005:38रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 सित॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 सित॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 सित॰ 2025कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
17 सित॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
19 सित॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 सित॰ 2025आश्विन अमावस्याअमावस्या
25 सित॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 अक्टू॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2025आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
10 अक्टू॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2160° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।