8 अक्टूबर 2025 को रियाद का पंचांग

बुधवार, 8 अक्टूबर 2025, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

बुधवार, 8 अक्टूबर 2025 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वितीया (23:53 तक), नक्षत्र अश्विनी (20:14 तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 05:47 पर और सूर्यास्त 17:32 पर है। राहुकाल 11:40 से 13:08 तक है।

दिन और रात
दिन 05:47 – 17:32
रात 05:48 तक
तिथि
द्वितीया, 23:53 तक
तृतीया
नक्षत्र
अश्विनी, 20:14 तक
भरणी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 23:53 तक
कृष्ण तृतीया 20:24, 9 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
भरणी 17:32, 9 अक्टू॰ तक
योग
हर्षण 23:02 तक
वज्रअशुभ 19:02, 9 अक्टू॰ तक
करण
तैतिल 13:38 तक
गर 23:53 तक
वणिज 10:08, 9 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:47
सूर्यास्त
17:32
चंद्रोदय
18:21
चंद्रास्त
06:54
दिनमान
11h 45m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:10 – 04:59
अभिजीत मुहूर्त
11:16 – 12:03 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:40 – 13:08
यमगंड
07:16 – 08:44
गुलिक काल
10:12 – 11:40

8 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:47 – 07:16शुभ
अमृत07:16 – 08:44शुभ
काल08:44 – 10:12टालें
शुभ10:12 – 11:40शुभ
रोग11:40 – 13:08टालें
उद्वेग13:08 – 14:36टालें
चर14:36 – 16:04सामान्य
लाभ16:04 – 17:32शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:32 – 19:04टालें
शुभ19:04 – 20:36शुभ
अमृत20:36 – 22:08शुभ
चर22:08 – 23:40सामान्य
रोग23:40 – 01:12टालें
काल01:12 – 02:44टालें
लाभ02:44 – 04:16शुभ
उद्वेग04:16 – 05:48टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:4706:46दिन
चंद्र06:4607:45दिन
शनि07:4508:44दिन
गुरु08:4409:42दिन
मंगल09:4210:41दिन
सूर्य10:4111:40दिन
शुक्र11:4012:39दिन
बुध12:3913:37दिन
चंद्र13:3714:36दिन
शनि14:3615:35दिन
गुरु15:3516:34दिन
मंगल16:3417:32दिन
सूर्य17:3218:34रात
शुक्र18:3419:35रात
बुध19:3520:36रात
चंद्र20:3621:38रात
शनि21:3822:39रात
गुरु22:3923:40रात
मंगल23:4000:41रात
सूर्य00:4101:43रात
शुक्र01:4302:44रात
बुध02:4403:45रात
चंद्र03:4504:47रात
शनि04:4705:48रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 अक्टू॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 अक्टू॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 अक्टू॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 अक्टू॰ 2025तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 अक्टू॰ 2025कार्तिक अमावस्याअमावस्या
25 अक्टू॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
1 नव॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 नव॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
5 नव॰ 2025कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2170° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।