19 अक्टूबर 2025 को रियाद का पंचांग

रविवार, 19 अक्टूबर 2025, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

रविवार, 19 अक्टूबर 2025 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (11:22 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (15:19 तक) और योग इंद्र है। सूर्योदय 05:53 पर और सूर्यास्त 17:22 पर है। राहुकाल 15:56 से 17:22 तक है।

दिन और रात
दिन 05:53 – 17:22
रात 05:53 तक
तिथि
त्रयोदशी, 11:22 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 15:19 तक
हस्त
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

19 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 11:22 तक
कृष्ण चतुर्दशी 13:15, 20 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
हस्त 17:46, 20 अक्टू॰ तक
योग
इंद्र 23:34 तक
वैधृतिअशुभ 00:04, 21 अक्टू॰ तक
करण
वणिज 11:22 तक
विष्टि (भद्रा) 00:16, 20 अक्टू॰ तक
शकुनि 13:15, 20 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:53
सूर्यास्त
17:22
चंद्रोदय
03:55
चंद्रास्त
16:08
दिनमान
11h 30m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:13 – 05:03
अभिजीत मुहूर्त
11:14 – 12:00

अशुभ समय

राहुकाल
15:56 – 17:22
यमगंड
11:37 – 13:04
गुलिक काल
14:30 – 15:56

19 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:53 – 07:19टालें
चर07:19 – 08:45सामान्य
लाभ08:45 – 10:11शुभ
अमृत10:11 – 11:37शुभ
काल11:37 – 13:04टालें
शुभ13:04 – 14:30शुभ
रोग14:30 – 15:56टालें
उद्वेग15:56 – 17:22टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:22 – 18:56शुभ
अमृत18:56 – 20:30शुभ
चर20:30 – 22:04सामान्य
रोग22:04 – 23:38टालें
काल23:38 – 01:11टालें
लाभ01:11 – 02:45शुभ
उद्वेग02:45 – 04:19टालें
शुभ04:19 – 05:53शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:5306:50दिन
शुक्र06:5007:47दिन
बुध07:4708:45दिन
चंद्र08:4509:42दिन
शनि09:4210:40दिन
गुरु10:4011:37दिन
मंगल11:3712:35दिन
सूर्य12:3513:32दिन
शुक्र13:3214:30दिन
बुध14:3015:27दिन
चंद्र15:2716:25दिन
शनि16:2517:22दिन
गुरु17:2218:25रात
मंगल18:2519:27रात
सूर्य19:2720:30रात
शुक्र20:3021:33रात
बुध21:3322:35रात
चंद्र22:3523:38रात
शनि23:3800:40रात
गुरु00:4001:43रात
मंगल01:4302:45रात
सूर्य02:4503:48रात
शुक्र03:4804:50रात
बुध04:5005:53रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
19 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 अक्टू॰ 2025कार्तिक अमावस्याअमावस्या
25 अक्टू॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
1 नव॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 नव॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
5 नव॰ 2025कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
8 नव॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 नव॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 नव॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 नव॰ 2025वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2174° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।