22 मार्च 2026 को रियाद का पंचांग

रविवार, 22 मार्च 2026, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

रविवार, 22 मार्च 2026 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (18:47 तक), नक्षत्र भरणी (20:12 तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 05:55 पर और सूर्यास्त 18:05 पर है। राहुकाल 16:33 से 18:05 तक है।

दिन और रात
दिन 05:55 – 18:05
रात 05:54 तक
तिथि
चतुर्थी, 18:47 तक
पंचमी
नक्षत्र
भरणी, 20:12 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 मार्च 2026 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 18:47 तक
शुक्ल पंचमी 16:08, 23 मार्च तक
नक्षत्र
भरणी 20:12 तक
कृत्तिका 18:19, 23 मार्च तक
योग
वैधृतिअशुभ 13:11 तक
विष्कंभअशुभ 09:52, 23 मार्च तक
करण
वणिज 08:07 तक
विष्टि (भद्रा) 18:47 तक
बव 05:27, 23 मार्च तक
बालव 16:08, 23 मार्च तक
चंद्र राशि
मेष 01:44, 23 मार्च तक
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:55
सूर्यास्त
18:05
चंद्रोदय
07:53
चंद्रास्त
21:48
दिनमान
12h 10m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:20 – 05:07
अभिजीत मुहूर्त
11:35 – 12:24

अशुभ समय

राहुकाल
16:33 – 18:05
यमगंड
12:00 – 13:31
गुलिक काल
15:02 – 16:33

22 मार्च 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:55 – 07:26टालें
चर07:26 – 08:57सामान्य
लाभ08:57 – 10:28शुभ
अमृत10:28 – 12:00शुभ
काल12:00 – 13:31टालें
शुभ13:31 – 15:02शुभ
रोग15:02 – 16:33टालें
उद्वेग16:33 – 18:05टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:05 – 19:33शुभ
अमृत19:33 – 21:02शुभ
चर21:02 – 22:31सामान्य
रोग22:31 – 23:59टालें
काल23:59 – 01:28टालें
लाभ01:28 – 02:56शुभ
उद्वेग02:56 – 04:25टालें
शुभ04:25 – 05:54शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:5506:56दिन
शुक्र06:5607:56दिन
बुध07:5608:57दिन
चंद्र08:5709:58दिन
शनि09:5810:59दिन
गुरु10:5912:00दिन
मंगल12:0013:00दिन
सूर्य13:0014:01दिन
शुक्र14:0115:02दिन
बुध15:0216:03दिन
चंद्र16:0317:04दिन
शनि17:0418:05दिन
गुरु18:0519:04रात
मंगल19:0420:03रात
सूर्य20:0321:02रात
शुक्र21:0222:01रात
बुध22:0123:00रात
चंद्र23:0023:59रात
शनि23:5900:58रात
गुरु00:5801:57रात
मंगल01:5702:56रात
सूर्य02:5603:56रात
शुक्र03:5604:55रात
बुध04:5505:54रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 मार्च 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
28 मार्च 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
30 मार्च 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 अप्रैल 2026चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
6 अप्रैल 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 अप्रैल 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 अप्रैल 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 अप्रैल 2026मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
15 अप्रैल 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 अप्रैल 2026वैशाख अमावस्याअमावस्या
20 अप्रैल 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2233° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।