30 मार्च 2026 को रियाद का पंचांग

सोमवार, 30 मार्च 2026, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

सोमवार, 30 मार्च 2026 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (04:26, 31 मार्च तक), नक्षत्र मघा (12:18 तक) और योग शूल है। सूर्योदय 05:47 पर और सूर्यास्त 18:08 पर है। राहुकाल 07:19 से 08:52 तक है।

दिन और रात
दिन 05:47 – 18:08
रात 05:46 तक
तिथि
त्रयोदशी, 04:26 तक
नक्षत्र
मघा, 12:18 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 मार्च 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 04:26, 31 मार्च तक
शुक्ल चतुर्दशी 04:36, 1 अप्रैल तक
नक्षत्र
मघा 12:18 तक
पूर्वा फाल्गुनी 12:51, 31 मार्च तक
योग
शूलअशुभ 14:21 तक
गंडअशुभ 13:11, 31 मार्च तक
करण
कौलव 16:30 तक
तैतिल 04:26, 31 मार्च तक
गर 16:28, 31 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:47
सूर्यास्त
18:08
चंद्रोदय
15:51
चंद्रास्त
04:03
दिनमान
12h 21m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:13 – 05:00
अभिजीत मुहूर्त
11:33 – 12:22

अशुभ समय

राहुकाल
07:19 – 08:52
यमगंड
10:25 – 11:57
गुलिक काल
13:30 – 15:03

30 मार्च 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:47 – 07:19शुभ
काल07:19 – 08:52टालें
शुभ08:52 – 10:25शुभ
रोग10:25 – 11:57टालें
उद्वेग11:57 – 13:30टालें
चर13:30 – 15:03सामान्य
लाभ15:03 – 16:35शुभ
अमृत16:35 – 18:08शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:08 – 19:35सामान्य
रोग19:35 – 21:02टालें
काल21:02 – 22:30टालें
लाभ22:30 – 23:57शुभ
उद्वेग23:57 – 01:24टालें
शुभ01:24 – 02:51शुभ
अमृत02:51 – 04:18शुभ
चर04:18 – 05:46सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:4706:48दिन
शनि06:4807:50दिन
गुरु07:5008:52दिन
मंगल08:5209:54दिन
सूर्य09:5410:55दिन
शुक्र10:5511:57दिन
बुध11:5712:59दिन
चंद्र12:5914:01दिन
शनि14:0115:03दिन
गुरु15:0316:04दिन
मंगल16:0417:06दिन
सूर्य17:0618:08दिन
शुक्र18:0819:06रात
बुध19:0620:04रात
चंद्र20:0421:02रात
शनि21:0222:00रात
गुरु22:0022:59रात
मंगल22:5923:57रात
सूर्य23:5700:55रात
शुक्र00:5501:53रात
बुध01:5302:51रात
चंद्र02:5103:49रात
शनि03:4904:47रात
गुरु04:4705:46रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
30 मार्च 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 अप्रैल 2026चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
6 अप्रैल 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 अप्रैल 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 अप्रैल 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 अप्रैल 2026मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
15 अप्रैल 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 अप्रैल 2026वैशाख अमावस्याअमावस्या
20 अप्रैल 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 अप्रैल 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2236° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।