12 फ़रवरी 2027 को रियाद का पंचांग

शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2027, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2027 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (00:29, 13 फ़र॰ तक), नक्षत्र अश्विनी (03:26, 13 फ़र॰ तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 06:29 पर और सूर्यास्त 17:45 पर है। राहुकाल 10:42 से 12:07 तक है।

दिन और रात
दिन 06:29 – 17:45
रात 06:28 तक
तिथि
षष्ठी, 00:29 तक
सप्तमी
नक्षत्र
अश्विनी, 03:26 तक
भरणी
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 फ़रवरी 2027 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 00:29, 13 फ़र॰ तक
शुक्ल सप्तमी 23:37, 13 फ़र॰ तक
नक्षत्र
अश्विनी 03:26, 13 फ़र॰ तक
भरणी 03:07, 14 फ़र॰ तक
योग
शुभ 16:32 तक
शुक्ल 14:48, 13 फ़र॰ तक
करण
कौलव 12:43 तक
तैतिल 00:29, 13 फ़र॰ तक
गर 12:07, 13 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:29
सूर्यास्त
17:45
चंद्रोदय
09:32
चंद्रास्त
23:00
दिनमान
11h 16m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:47 – 05:38
अभिजीत मुहूर्त
11:44 – 12:29

अशुभ समय

राहुकाल
10:42 – 12:07
यमगंड
14:56 – 16:20
गुलिक काल
07:53 – 09:18

12 फ़रवरी 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:29 – 07:53सामान्य
लाभ07:53 – 09:18शुभ
अमृत09:18 – 10:42शुभ
काल10:42 – 12:07टालें
शुभ12:07 – 13:31शुभ
रोग13:31 – 14:56टालें
उद्वेग14:56 – 16:20टालें
चर16:20 – 17:45सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:45 – 19:20टालें
काल19:20 – 20:56टालें
लाभ20:56 – 22:31शुभ
उद्वेग22:31 – 00:07टालें
शुभ00:07 – 01:42शुभ
अमृत01:42 – 03:17शुभ
चर03:17 – 04:53सामान्य
रोग04:53 – 06:28टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:2907:25दिन
बुध07:2508:22दिन
चंद्र08:2209:18दिन
शनि09:1810:14दिन
गुरु10:1411:11दिन
मंगल11:1112:07दिन
सूर्य12:0713:03दिन
शुक्र13:0314:00दिन
बुध14:0014:56दिन
चंद्र14:5615:52दिन
शनि15:5216:49दिन
गुरु16:4917:45दिन
मंगल17:4518:49रात
सूर्य18:4919:52रात
शुक्र19:5220:56रात
बुध20:5621:59रात
चंद्र21:5923:03रात
शनि23:0300:07रात
गुरु00:0701:10रात
मंगल01:1002:14रात
सूर्य02:1403:17रात
शुक्र03:1704:21रात
बुध04:2105:25रात
चंद्र05:2506:28रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 फ़र॰ 2027कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
17 फ़र॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
19 फ़र॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 फ़र॰ 2027माघ पूर्णिमापूर्णिमा
24 फ़र॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 फ़र॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 मार्च 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 मार्च 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 मार्च 2027फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
12 मार्च 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2358° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।