20 मार्च 2027 को रियाद का पंचांग

शनिवार, 20 मार्च 2027, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

शनिवार, 20 मार्च 2027 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (18:15 तक), नक्षत्र मघा (21:14 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 05:57 पर और सूर्यास्त 18:04 पर है। राहुकाल 08:59 से 10:30 तक है।

दिन और रात
दिन 05:57 – 18:04
रात 05:56 तक
तिथि
त्रयोदशी, 18:15 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
मघा, 21:14 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 मार्च 2027 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 18:15 तक
शुक्ल चतुर्दशी 15:52, 21 मार्च तक
नक्षत्र
मघा 21:14 तक
पूर्वा फाल्गुनी 19:37, 21 मार्च तक
योग
धृति 17:35 तक
शूलअशुभ 14:28, 21 मार्च तक
करण
कौलव 07:31 तक
तैतिल 18:15 तक
गर 05:02, 21 मार्च तक
वणिज 15:52, 21 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:57
सूर्यास्त
18:04
चंद्रोदय
16:10
चंद्रास्त
04:22
दिनमान
12h 6m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:22 – 05:10
अभिजीत मुहूर्त
11:36 – 12:25

अशुभ समय

राहुकाल
08:59 – 10:30
यमगंड
13:31 – 15:02
गुलिक काल
05:57 – 07:28

20 मार्च 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:57 – 07:28टालें
शुभ07:28 – 08:59शुभ
रोग08:59 – 10:30टालें
उद्वेग10:30 – 12:00टालें
चर12:00 – 13:31सामान्य
लाभ13:31 – 15:02शुभ
अमृत15:02 – 16:33शुभ
काल16:33 – 18:04टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:04 – 19:33शुभ
उद्वेग19:33 – 21:02टालें
शुभ21:02 – 22:31शुभ
अमृत22:31 – 00:00शुभ
चर00:00 – 01:29सामान्य
रोग01:29 – 02:58टालें
काल02:58 – 04:27टालें
लाभ04:27 – 05:56शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:5706:58दिन
गुरु06:5807:58दिन
मंगल07:5808:59दिन
सूर्य08:5909:59दिन
शुक्र09:5911:00दिन
बुध11:0012:00दिन
चंद्र12:0013:01दिन
शनि13:0114:01दिन
गुरु14:0115:02दिन
मंगल15:0216:03दिन
सूर्य16:0317:03दिन
शुक्र17:0318:04दिन
बुध18:0419:03रात
चंद्र19:0320:02रात
शनि20:0221:02रात
गुरु21:0222:01रात
मंगल22:0123:00रात
सूर्य23:0000:00रात
शुक्र00:0000:59रात
बुध00:5901:59रात
चंद्र01:5902:58रात
शनि02:5803:57रात
गुरु03:5704:57रात
मंगल04:5705:56रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 मार्च 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 मार्च 2027फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
26 मार्च 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
30 मार्च 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 अप्रैल 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 अप्रैल 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 अप्रैल 2027चैत्र अमावस्याअमावस्या
10 अप्रैल 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 अप्रैल 2027मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
17 अप्रैल 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
18 अप्रैल 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2372° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।