4 अप्रैल 2027 को रियाद का पंचांग

रविवार, 4 अप्रैल 2027, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

रविवार, 4 अप्रैल 2027 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (02:53, 5 अप्रैल तक), नक्षत्र शतभिषा (14:03 तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 05:42 पर और सूर्यास्त 18:10 पर है। राहुकाल 16:36 से 18:10 तक है।

दिन और रात
दिन 05:42 – 18:10
रात 05:41 तक
तिथि
त्रयोदशी, 02:53 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
शतभिषा, 14:03 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 अप्रैल 2027 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 02:53, 5 अप्रैल तक
कृष्ण चतुर्दशी 03:10, 6 अप्रैल तक
नक्षत्र
शतभिषा 14:03 तक
पूर्वा भाद्रपद 15:17, 5 अप्रैल तक
योग
शुभ 07:44 तक
शुक्ल 07:17, 5 अप्रैल तक
करण
गर 14:30 तक
वणिज 02:53, 5 अप्रैल तक
विष्टि (भद्रा) 15:07, 5 अप्रैल तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमीन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:42
सूर्यास्त
18:10
चंद्रोदय
03:56
चंद्रास्त
15:57
दिनमान
12h 28m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:10 – 04:56
अभिजीत मुहूर्त
11:31 – 12:21

अशुभ समय

राहुकाल
16:36 – 18:10
यमगंड
11:56 – 13:29
गुलिक काल
15:03 – 16:36

4 अप्रैल 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:42 – 07:15टालें
चर07:15 – 08:49सामान्य
लाभ08:49 – 10:22शुभ
अमृत10:22 – 11:56शुभ
काल11:56 – 13:29टालें
शुभ13:29 – 15:03शुभ
रोग15:03 – 16:36टालें
उद्वेग16:36 – 18:10टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:10 – 19:36शुभ
अमृत19:36 – 21:03शुभ
चर21:03 – 22:29सामान्य
रोग22:29 – 23:55टालें
काल23:55 – 01:22टालें
लाभ01:22 – 02:48शुभ
उद्वेग02:48 – 04:14टालें
शुभ04:14 – 05:41शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:4206:44दिन
शुक्र06:4407:47दिन
बुध07:4708:49दिन
चंद्र08:4909:51दिन
शनि09:5110:54दिन
गुरु10:5411:56दिन
मंगल11:5612:58दिन
सूर्य12:5814:01दिन
शुक्र14:0115:03दिन
बुध15:0316:05दिन
चंद्र16:0517:08दिन
शनि17:0818:10दिन
गुरु18:1019:08रात
मंगल19:0820:05रात
सूर्य20:0521:03रात
शुक्र21:0322:00रात
बुध22:0022:58रात
चंद्र22:5823:55रात
शनि23:5500:53रात
गुरु00:5301:51रात
मंगल01:5102:48रात
सूर्य02:4803:46रात
शुक्र03:4604:43रात
बुध04:4305:41रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
4 अप्रैल 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 अप्रैल 2027चैत्र अमावस्याअमावस्या
10 अप्रैल 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 अप्रैल 2027मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
17 अप्रैल 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
18 अप्रैल 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 अप्रैल 2027चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
24 अप्रैल 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 अप्रैल 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 मई 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2378° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।