15 सितंबर 2027 को रियाद का पंचांग

बुधवार, 15 सितंबर 2027, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

बुधवार, 15 सितंबर 2027 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (02:03, 16 सित॰ तक), नक्षत्र शतभिषा (09:03 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 05:39 पर और सूर्यास्त 17:57 पर है। राहुकाल 11:48 से 13:20 तक है।

दिन और रात
दिन 05:39 – 17:57
रात 05:39 तक
तिथि
पूर्णिमा, 02:03 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
शतभिषा, 09:03 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 सितंबर 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
पूर्णिमा 02:03, 16 सित॰ तक
कृष्ण प्रतिपदा 03:22, 17 सित॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 09:03 तक
पूर्वा भाद्रपद 11:14, 16 सित॰ तक
योग
धृति 06:42 तक
शूलअशुभ 07:00, 16 सित॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 13:14 तक
बव 02:03, 16 सित॰ तक
बालव 14:46, 16 सित॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 04:43, 16 सित॰ तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:39
सूर्यास्त
17:57
चंद्रोदय
17:32
चंद्रास्त
04:59
दिनमान
12h 18m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:05 – 04:52
अभिजीत मुहूर्त
11:23 – 12:12 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:48 – 13:20
यमगंड
07:11 – 08:43
गुलिक काल
10:15 – 11:48

15 सितंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:39 – 07:11शुभ
अमृत07:11 – 08:43शुभ
काल08:43 – 10:15टालें
शुभ10:15 – 11:48शुभ
रोग11:48 – 13:20टालें
उद्वेग13:20 – 14:52टालें
चर14:52 – 16:25सामान्य
लाभ16:25 – 17:57शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:57 – 19:25टालें
शुभ19:25 – 20:52शुभ
अमृत20:52 – 22:20शुभ
चर22:20 – 23:48सामान्य
रोग23:48 – 01:16टालें
काल01:16 – 02:43टालें
लाभ02:43 – 04:11शुभ
उद्वेग04:11 – 05:39टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:3906:40दिन
चंद्र06:4007:42दिन
शनि07:4208:43दिन
गुरु08:4309:45दिन
मंगल09:4510:46दिन
सूर्य10:4611:48दिन
शुक्र11:4812:49दिन
बुध12:4913:51दिन
चंद्र13:5114:52दिन
शनि14:5215:54दिन
गुरु15:5416:55दिन
मंगल16:5517:57दिन
सूर्य17:5718:55रात
शुक्र18:5519:54रात
बुध19:5420:52रात
चंद्र20:5221:51रात
शनि21:5122:49रात
गुरु22:4923:48रात
मंगल23:4800:46रात
सूर्य00:4601:45रात
शुक्र01:4502:43रात
बुध02:4303:42रात
चंद्र03:4204:40रात
शनि04:4005:39रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
15 सित॰ 2027भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
17 सित॰ 2027कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
19 सित॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 सित॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 सित॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
28 सित॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 सित॰ 2027आश्विन अमावस्याअमावस्या
3 अक्टू॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
11 अक्टू॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2441° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।