18 अक्टूबर 2027 को रियाद का पंचांग

सोमवार, 18 अक्टूबर 2027, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

सोमवार, 18 अक्टूबर 2027 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (15:22 तक), नक्षत्र कृत्तिका (21:18 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 05:52 पर और सूर्यास्त 17:24 पर है। राहुकाल 07:18 से 08:45 तक है।

दिन और रात
दिन 05:52 – 17:24
रात 05:52 तक
तिथि
तृतीया, 15:22 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
कृत्तिका, 21:18 तक
रोहिणी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 अक्टूबर 2027 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 15:22 तक
कृष्ण चतुर्थी 14:12, 19 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 20:45, 19 अक्टू॰ तक
योग
सिद्धि 08:47 तक
व्यतीपातअशुभ 06:47, 19 अक्टू॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 15:22 तक
बव 02:49, 19 अक्टू॰ तक
बालव 14:12, 19 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:52
सूर्यास्त
17:24
चंद्रोदय
19:16
चंद्रास्त
08:28
दिनमान
11h 32m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:12 – 05:02
अभिजीत मुहूर्त
11:15 – 12:01

अशुभ समय

राहुकाल
07:18 – 08:45
यमगंड
10:11 – 11:38
गुलिक काल
13:04 – 14:31

18 अक्टूबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:52 – 07:18शुभ
काल07:18 – 08:45टालें
शुभ08:45 – 10:11शुभ
रोग10:11 – 11:38टालें
उद्वेग11:38 – 13:04टालें
चर13:04 – 14:31सामान्य
लाभ14:31 – 15:57शुभ
अमृत15:57 – 17:24शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:24 – 18:57सामान्य
रोग18:57 – 20:31टालें
काल20:31 – 22:04टालें
लाभ22:04 – 23:38शुभ
उद्वेग23:38 – 01:12टालें
शुभ01:12 – 02:45शुभ
अमृत02:45 – 04:19शुभ
चर04:19 – 05:52सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:5206:49दिन
शनि06:4907:47दिन
गुरु07:4708:45दिन
मंगल08:4509:42दिन
सूर्य09:4210:40दिन
शुक्र10:4011:38दिन
बुध11:3812:35दिन
चंद्र12:3513:33दिन
शनि13:3314:31दिन
गुरु14:3115:28दिन
मंगल15:2816:26दिन
सूर्य16:2617:24दिन
शुक्र17:2418:26रात
बुध18:2619:28रात
चंद्र19:2820:31रात
शनि20:3121:33रात
गुरु21:3322:36रात
मंगल22:3623:38रात
सूर्य23:3800:40रात
शुक्र00:4001:43रात
बुध01:4302:45रात
चंद्र02:4503:47रात
शनि03:4704:50रात
गुरु04:5005:52रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
19 अक्टू॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 अक्टू॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 अक्टू॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 अक्टू॰ 2027कार्तिक अमावस्याअमावस्या
2 नव॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
9 नव॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 नव॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 नव॰ 2027कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
16 नव॰ 2027वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2453° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।