6 नवंबर 2027 को रियाद का पंचांग

शनिवार, 6 नवंबर 2027, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

शनिवार, 6 नवंबर 2027 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (00:20, 7 नव॰ तक), नक्षत्र श्रवण (18:56 तक) और योग गंड है। सूर्योदय 06:02 पर और सूर्यास्त 17:10 पर है। राहुकाल 08:49 से 10:13 तक है।

दिन और रात
दिन 06:02 – 17:10
रात 06:03 तक
तिथि
अष्टमी, 00:20 तक
नवमी
नक्षत्र
श्रवण, 18:56 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 नवंबर 2027 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 00:20, 7 नव॰ तक
शुक्ल नवमी 02:54, 8 नव॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 18:56 तक
धनिष्ठा 22:00, 7 नव॰ तक
योग
गंडअशुभ 19:23 तक
वृद्धि 20:20, 7 नव॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 11:00 तक
बव 00:20, 7 नव॰ तक
बालव 13:39, 7 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:02
सूर्यास्त
17:10
चंद्रोदय
12:28
चंद्रास्त
23:51
दिनमान
11h 7m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:19 – 05:11
अभिजीत मुहूर्त
11:14 – 11:58

अशुभ समय

राहुकाल
08:49 – 10:13
यमगंड
12:59 – 14:23
गुलिक काल
06:02 – 07:26

6 नवंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:02 – 07:26टालें
शुभ07:26 – 08:49शुभ
रोग08:49 – 10:13टालें
उद्वेग10:13 – 11:36टालें
चर11:36 – 12:59सामान्य
लाभ12:59 – 14:23शुभ
अमृत14:23 – 15:46शुभ
काल15:46 – 17:10टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:10 – 18:46शुभ
उद्वेग18:46 – 20:23टालें
शुभ20:23 – 22:00शुभ
अमृत22:00 – 23:36शुभ
चर23:36 – 01:13सामान्य
रोग01:13 – 02:50टालें
काल02:50 – 04:26टालें
लाभ04:26 – 06:03शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:0206:58दिन
गुरु06:5807:54दिन
मंगल07:5408:49दिन
सूर्य08:4909:45दिन
शुक्र09:4510:40दिन
बुध10:4011:36दिन
चंद्र11:3612:32दिन
शनि12:3213:27दिन
गुरु13:2714:23दिन
मंगल14:2315:19दिन
सूर्य15:1916:14दिन
शुक्र16:1417:10दिन
बुध17:1018:14रात
चंद्र18:1419:19रात
शनि19:1920:23रात
गुरु20:2321:28रात
मंगल21:2822:32रात
सूर्य22:3223:36रात
शुक्र23:3600:41रात
बुध00:4101:45रात
चंद्र01:4502:50रात
शनि02:5003:54रात
गुरु03:5404:59रात
मंगल04:5906:03रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 नव॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 नव॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 नव॰ 2027कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
16 नव॰ 2027वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 नव॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 नव॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 नव॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
28 नव॰ 2027मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
2 दिस॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2460° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।