13 अप्रैल 2028 को रियाद का पंचांग

गुरुवार, 13 अप्रैल 2028, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

गुरुवार, 13 अप्रैल 2028 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (04:43, 14 अप्रैल तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (04:00, 14 अप्रैल तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 05:32 पर और सूर्यास्त 18:14 पर है। राहुकाल 13:28 से 15:04 तक है।

दिन और रात
दिन 05:32 – 18:14
रात 05:31 तक
तिथि
पंचमी, 04:43 तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा, 04:00 तक
मूल
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

13 अप्रैल 2028 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 04:43, 14 अप्रैल तक
कृष्ण षष्ठी 05:18, 15 अप्रैल तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 04:00, 14 अप्रैल तक
मूल 05:11, 15 अप्रैल तक
योग
वरीयान 03:22, 14 अप्रैल तक
परिघअशुभ 02:43, 15 अप्रैल तक
करण
कौलव 16:44 तक
तैतिल 04:43, 14 अप्रैल तक
गर 16:54, 14 अप्रैल तक
चंद्र राशि
वृश्चिक 04:00, 14 अप्रैल तक
सूर्य राशिमीन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:32
सूर्यास्त
18:14
चंद्रोदय
22:37
चंद्रास्त
08:19
दिनमान
12h 42m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:02 – 04:47
अभिजीत मुहूर्त
11:28 – 12:19

अशुभ समय

राहुकाल
13:28 – 15:04
यमगंड
05:32 – 07:08
गुलिक काल
08:43 – 10:18

13 अप्रैल 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:32 – 07:08शुभ
रोग07:08 – 08:43टालें
उद्वेग08:43 – 10:18टालें
चर10:18 – 11:53सामान्य
लाभ11:53 – 13:28शुभ
अमृत13:28 – 15:04शुभ
काल15:04 – 16:39टालें
शुभ16:39 – 18:14शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:14 – 19:39शुभ
चर19:39 – 21:03सामान्य
रोग21:03 – 22:28टालें
काल22:28 – 23:53टालें
लाभ23:53 – 01:17शुभ
उद्वेग01:17 – 02:42टालें
शुभ02:42 – 04:07शुभ
अमृत04:07 – 05:31शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:3206:36दिन
मंगल06:3607:39दिन
सूर्य07:3908:43दिन
शुक्र08:4309:46दिन
बुध09:4610:50दिन
चंद्र10:5011:53दिन
शनि11:5312:57दिन
गुरु12:5714:00दिन
मंगल14:0015:04दिन
सूर्य15:0416:07दिन
शुक्र16:0717:11दिन
बुध17:1118:14दिन
चंद्र18:1419:11रात
शनि19:1120:07रात
गुरु20:0721:03रात
मंगल21:0322:00रात
सूर्य22:0022:56रात
शुक्र22:5623:53रात
बुध23:5300:49रात
चंद्र00:4901:46रात
शनि01:4602:42रात
गुरु02:4203:38रात
मंगल03:3804:35रात
सूर्य04:3505:31रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 अप्रैल 2028मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
17 अप्रैल 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
20 अप्रैल 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
22 अप्रैल 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
24 अप्रैल 2028वैशाख अमावस्याअमावस्या
28 अप्रैल 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
5 मई 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
6 मई 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
8 मई 2028वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
12 मई 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2521° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।