9 अक्टूबर 2028 को रियाद का पंचांग

सोमवार, 9 अक्टूबर 2028, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

सोमवार, 9 अक्टूबर 2028 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (03:32, 10 अक्टू॰ तक), नक्षत्र मृगशिरा (06:40, 10 अक्टू॰ तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 05:48 पर और सूर्यास्त 17:31 पर है। राहुकाल 07:16 से 08:44 तक है।

दिन और रात
दिन 05:48 – 17:31
रात 05:48 तक
तिथि
षष्ठी, 03:32 तक
सप्तमी
नक्षत्र
मृगशिरा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 अक्टूबर 2028 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 03:32, 10 अक्टू॰ तक
कृष्ण सप्तमी 03:18, 11 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मृगशिरा 06:40, 10 अक्टू॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 07:58 तक
वरीयान 07:04, 10 अक्टू॰ तक
करण
गर 15:26 तक
वणिज 03:32, 10 अक्टू॰ तक
विष्टि (भद्रा) 15:30, 10 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 18:17 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:48
सूर्यास्त
17:31
चंद्रोदय
21:30
चंद्रास्त
10:46
दिनमान
11h 43m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:10 – 04:59
अभिजीत मुहूर्त
11:16 – 12:03

अशुभ समय

राहुकाल
07:16 – 08:44
यमगंड
10:12 – 11:40
गुलिक काल
13:07 – 14:35

9 अक्टूबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:48 – 07:16शुभ
काल07:16 – 08:44टालें
शुभ08:44 – 10:12शुभ
रोग10:12 – 11:40टालें
उद्वेग11:40 – 13:07टालें
चर13:07 – 14:35सामान्य
लाभ14:35 – 16:03शुभ
अमृत16:03 – 17:31शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:31 – 19:03सामान्य
रोग19:03 – 20:35टालें
काल20:35 – 22:08टालें
लाभ22:08 – 23:40शुभ
उद्वेग23:40 – 01:12टालें
शुभ01:12 – 02:44शुभ
अमृत02:44 – 04:16शुभ
चर04:16 – 05:48सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:4806:47दिन
शनि06:4707:45दिन
गुरु07:4508:44दिन
मंगल08:4409:42दिन
सूर्य09:4210:41दिन
शुक्र10:4111:40दिन
बुध11:4012:38दिन
चंद्र12:3813:37दिन
शनि13:3714:35दिन
गुरु14:3515:34दिन
मंगल15:3416:33दिन
सूर्य16:3317:31दिन
शुक्र17:3118:33रात
बुध18:3319:34रात
चंद्र19:3420:35रात
शनि20:3521:37रात
गुरु21:3722:38रात
मंगल22:3823:40रात
सूर्य23:4000:41रात
शुक्र00:4101:43रात
बुध01:4302:44रात
चंद्र02:4403:46रात
शनि03:4604:47रात
गुरु04:4705:48रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 अक्टू॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 अक्टू॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 अक्टू॰ 2028तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2028कार्तिक अमावस्याअमावस्या
21 अक्टू॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
28 अक्टू॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 नव॰ 2028कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
6 नव॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2590° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।