13 अप्रैल 2029 को रियाद का पंचांग

शुक्रवार, 13 अप्रैल 2029, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

शुक्रवार, 13 अप्रैल 2029 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (00:40, 14 अप्रैल तक), नक्षत्र रेवती (00:43, 14 अप्रैल तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 05:33 पर और सूर्यास्त 18:14 पर है। राहुकाल 10:18 से 11:53 तक है।

दिन और रात
दिन 05:33 – 18:14
रात 05:32 तक
तिथि
अमावस्या, 00:40 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
रेवती, 00:43 तक
अश्विनी
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

13 अप्रैल 2029 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
अमावस्या 00:40, 14 अप्रैल तक
शुक्ल प्रतिपदा 03:03, 15 अप्रैल तक
नक्षत्र
रेवती 00:43, 14 अप्रैल तक
अश्विनी 03:37, 15 अप्रैल तक
योग
वैधृतिअशुभ 00:46, 14 अप्रैल तक
विष्कंभअशुभ 01:38, 15 अप्रैल तक
करण
चतुष्पद 11:26 तक
नाग 00:40, 14 अप्रैल तक
किंस्तुघ्न 13:52, 14 अप्रैल तक
चंद्र राशि
मीन 00:43, 14 अप्रैल तक
सूर्य राशिमीन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:33
सूर्यास्त
18:14
चंद्रोदय
04:53
चंद्रास्त
17:57
दिनमान
12h 41m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
अधिक चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
अधिक चैत्र
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:02 – 04:47
अभिजीत मुहूर्त
11:28 – 12:19

अशुभ समय

राहुकाल
10:18 – 11:53
यमगंड
15:04 – 16:39
गुलिक काल
07:08 – 08:43

13 अप्रैल 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:33 – 07:08सामान्य
लाभ07:08 – 08:43शुभ
अमृत08:43 – 10:18शुभ
काल10:18 – 11:53टालें
शुभ11:53 – 13:28शुभ
रोग13:28 – 15:04टालें
उद्वेग15:04 – 16:39टालें
चर16:39 – 18:14सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:14 – 19:39टालें
काल19:39 – 21:03टालें
लाभ21:03 – 22:28शुभ
उद्वेग22:28 – 23:53टालें
शुभ23:53 – 01:18शुभ
अमृत01:18 – 02:42शुभ
चर02:42 – 04:07सामान्य
रोग04:07 – 05:32टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:3306:36दिन
बुध06:3607:39दिन
चंद्र07:3908:43दिन
शनि08:4309:46दिन
गुरु09:4610:50दिन
मंगल10:5011:53दिन
सूर्य11:5312:57दिन
शुक्र12:5714:00दिन
बुध14:0015:04दिन
चंद्र15:0416:07दिन
शनि16:0717:11दिन
गुरु17:1118:14दिन
मंगल18:1419:10रात
सूर्य19:1020:07रात
शुक्र20:0721:03रात
बुध21:0322:00रात
चंद्र22:0022:56रात
शनि22:5623:53रात
गुरु23:5300:49रात
मंगल00:4901:46रात
सूर्य01:4602:42रात
शुक्र02:4203:39रात
बुध03:3904:35रात
चंद्र04:3505:32रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 अप्रैल 2029अधिक चैत्र अमावस्याअमावस्या
14 अप्रैल 2029मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
18 अप्रैल 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
24 अप्रैल 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
26 अप्रैल 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 अप्रैल 2029चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
1 मई 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
5 मई 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
8 मई 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
11 मई 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2661° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।