30 सितंबर 2029 को रियाद का पंचांग

रविवार, 30 सितंबर 2029, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

रविवार, 30 सितंबर 2029 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण सप्तमी (11:19 तक), नक्षत्र मृगशिरा (10:18 तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 05:44 पर और सूर्यास्त 17:40 पर है। राहुकाल 16:11 से 17:40 तक है।

दिन और रात
दिन 05:44 – 17:40
रात 05:45 तक
तिथि
सप्तमी, 11:19 तक
अष्टमी
नक्षत्र
मृगशिरा, 10:18 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 सितंबर 2029 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 11:19 तक
कृष्ण अष्टमी 12:23, 1 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
आर्द्रा 11:59, 1 अक्टू॰ तक
योग
वरीयान 04:34, 1 अक्टू॰ तक
परिघअशुभ 03:55, 2 अक्टू॰ तक
करण
बव 11:19 तक
बालव 23:56 तक
कौलव 12:23, 1 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:44
सूर्यास्त
17:40
चंद्रोदय
23:02
चंद्रास्त
12:08
दिनमान
11h 56m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:08 – 04:56
अभिजीत मुहूर्त
11:18 – 12:06

अशुभ समय

राहुकाल
16:11 – 17:40
यमगंड
11:42 – 13:12
गुलिक काल
14:41 – 16:11

30 सितंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:44 – 07:14टालें
चर07:14 – 08:43सामान्य
लाभ08:43 – 10:13शुभ
अमृत10:13 – 11:42शुभ
काल11:42 – 13:12टालें
शुभ13:12 – 14:41शुभ
रोग14:41 – 16:11टालें
उद्वेग16:11 – 17:40टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:40 – 19:11शुभ
अमृत19:11 – 20:42शुभ
चर20:42 – 22:12सामान्य
रोग22:12 – 23:43टालें
काल23:43 – 01:13टालें
लाभ01:13 – 02:44शुभ
उद्वेग02:44 – 04:14टालें
शुभ04:14 – 05:45शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:4406:44दिन
शुक्र06:4407:44दिन
बुध07:4408:43दिन
चंद्र08:4309:43दिन
शनि09:4310:43दिन
गुरु10:4311:42दिन
मंगल11:4212:42दिन
सूर्य12:4213:42दिन
शुक्र13:4214:41दिन
बुध14:4115:41दिन
चंद्र15:4116:41दिन
शनि16:4117:40दिन
गुरु17:4018:41रात
मंगल18:4119:41रात
सूर्य19:4120:42रात
शुक्र20:4221:42रात
बुध21:4222:42रात
चंद्र22:4223:43रात
शनि23:4300:43रात
गुरु00:4301:43रात
मंगल01:4302:44रात
सूर्य02:4403:44रात
शुक्र03:4404:44रात
बुध04:4405:45रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 अक्टू॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2029आश्विन अमावस्याअमावस्या
11 अक्टू॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 अक्टू॰ 2029तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 अक्टू॰ 2029आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
26 अक्टू॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2726° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।