6 अक्टूबर 2029 को रियाद का पंचांग

शनिवार, 6 अक्टूबर 2029, रियाद, Saudi Arabia। समय Asia/Riyadh में है।

शनिवार, 6 अक्टूबर 2029 को रियाद में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (01:56, 7 अक्टू॰ तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (08:17 तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 05:47 पर और सूर्यास्त 17:34 पर है। राहुकाल 08:44 से 10:12 तक है।

दिन और रात
दिन 05:47 – 17:34
रात 05:47 तक
तिथि
चतुर्दशी, 01:56 तक
अमावस्या
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 05:36 तक
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 अक्टूबर 2029 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 01:56, 7 अक्टू॰ तक
अमावस्या 22:14, 7 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 05:36, 7 अक्टू॰ तक
हस्त 02:39, 8 अक्टू॰ तक
योग
शुक्ल 14:52 तक
ब्रह्म 10:47, 7 अक्टू॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 15:41 तक
शकुनि 01:56, 7 अक्टू॰ तक
चतुष्पद 12:07, 7 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 13:39 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:47
सूर्यास्त
17:34
चंद्रोदय
04:03
चंद्रास्त
16:22
दिनमान
11h 48m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:09 – 04:58
अभिजीत मुहूर्त
11:17 – 12:04

अशुभ समय

राहुकाल
08:44 – 10:12
यमगंड
13:09 – 14:37
गुलिक काल
05:47 – 07:15

6 अक्टूबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:47 – 07:15टालें
शुभ07:15 – 08:44शुभ
रोग08:44 – 10:12टालें
उद्वेग10:12 – 11:40टालें
चर11:40 – 13:09सामान्य
लाभ13:09 – 14:37शुभ
अमृत14:37 – 16:06शुभ
काल16:06 – 17:34टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:34 – 19:06शुभ
उद्वेग19:06 – 20:38टालें
शुभ20:38 – 22:09शुभ
अमृत22:09 – 23:41शुभ
चर23:41 – 01:12सामान्य
रोग01:12 – 02:44टालें
काल02:44 – 04:15टालें
लाभ04:15 – 05:47शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:4706:46दिन
गुरु06:4607:45दिन
मंगल07:4508:44दिन
सूर्य08:4409:43दिन
शुक्र09:4310:42दिन
बुध10:4211:40दिन
चंद्र11:4012:39दिन
शनि12:3913:38दिन
गुरु13:3814:37दिन
मंगल14:3715:36दिन
सूर्य15:3616:35दिन
शुक्र16:3517:34दिन
बुध17:3418:35रात
चंद्र18:3519:36रात
शनि19:3620:38रात
गुरु20:3821:39रात
मंगल21:3922:40रात
सूर्य22:4023:41रात
शुक्र23:4100:42रात
बुध00:4201:43रात
चंद्र01:4302:44रात
शनि02:4403:45रात
गुरु03:4504:46रात
मंगल04:4605:47रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
7 अक्टू॰ 2029आश्विन अमावस्याअमावस्या
11 अक्टू॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 अक्टू॰ 2029तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 अक्टू॰ 2029आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
26 अक्टू॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
30 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 नव॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 नव॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां रियाद में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2728° (लाहिड़ी)। समय रियाद (Asia/Riyadh) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।