17 अक्टूबर 2025 को सिएटल का पंचांग

शुक्रवार, 17 अक्टूबर 2025, सिएटल, संयुक्त राज्य। समय America/Los_Angeles में है।

शुक्रवार, 17 अक्टूबर 2025 को सिएटल में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (23:49 तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (03:11, 18 अक्टू॰ तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 07:31 पर और सूर्यास्त 18:16 पर है। राहुकाल 11:33 से 12:54 तक है।

दिन और रात
दिन 07:31 – 18:16
रात 07:33 तक
तिथि
द्वादशी, 23:49 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 03:11 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 23:49 तक
कृष्ण त्रयोदशी 01:22, 19 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी 03:11, 18 अक्टू॰ तक
उत्तरा फाल्गुनी 05:19, 19 अक्टू॰ तक
योग
शुक्ल 13:18 तक
ब्रह्म 13:18, 18 अक्टू॰ तक
करण
कौलव 11:12 तक
तैतिल 23:49 तक
गर 12:33, 18 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:31
सूर्यास्त
18:16
चंद्रोदय
03:26
चंद्रास्त
16:54
दिनमान
10h 45m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:45 – 06:38
अभिजीत मुहूर्त
12:32 – 13:15

अशुभ समय

राहुकाल
11:33 – 12:54
यमगंड
15:35 – 16:56
गुलिक काल
08:52 – 10:12

17 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर07:31 – 08:52सामान्य
लाभ08:52 – 10:12शुभ
अमृत10:12 – 11:33शुभ
काल11:33 – 12:54टालें
शुभ12:54 – 14:14शुभ
रोग14:14 – 15:35टालें
उद्वेग15:35 – 16:56टालें
चर16:56 – 18:16सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:16 – 19:56टालें
काल19:56 – 21:35टालें
लाभ21:35 – 23:15शुभ
उद्वेग23:15 – 00:54टालें
शुभ00:54 – 02:34शुभ
अमृत02:34 – 04:14शुभ
चर04:14 – 05:53सामान्य
रोग05:53 – 07:33टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र07:3108:25दिन
बुध08:2509:19दिन
चंद्र09:1910:12दिन
शनि10:1211:06दिन
गुरु11:0612:00दिन
मंगल12:0012:54दिन
सूर्य12:5413:47दिन
शुक्र13:4714:41दिन
बुध14:4115:35दिन
चंद्र15:3516:29दिन
शनि16:2917:22दिन
गुरु17:2218:16दिन
मंगल18:1619:23रात
सूर्य19:2320:29रात
शुक्र20:2921:35रात
बुध21:3522:42रात
चंद्र22:4223:48रात
शनि23:4800:54रात
गुरु00:5402:01रात
मंगल02:0103:07रात
सूर्य03:0704:14रात
शुक्र04:1405:20रात
बुध05:2006:26रात
चंद्र06:2607:33रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 अक्टू॰ 2025तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 अक्टू॰ 2025कार्तिक अमावस्याअमावस्या
25 अक्टू॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
1 नव॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 नव॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
4 नव॰ 2025कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
8 नव॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 नव॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 नव॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां सिएटल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2174° (लाहिड़ी)। समय सिएटल (America/Los_Angeles) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।