12 नवंबर 2026 को सिएटल का पंचांग

गुरुवार, 12 नवंबर 2026, सिएटल, संयुक्त राज्य। समय America/Los_Angeles में है।

गुरुवार, 12 नवंबर 2026 को सिएटल में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (07:13, 13 नव॰ तक), नक्षत्र मूल (03:47, 13 नव॰ तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 07:10 पर और सूर्यास्त 16:36 पर है। राहुकाल 13:03 से 14:14 तक है।

दिन और रात
दिन 07:10 – 16:36
रात 07:11 तक
तिथि
चतुर्थी
नक्षत्र
मूल, 03:47 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 नवंबर 2026 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 07:13, 13 नव॰ तक
नक्षत्र
मूल 03:47, 13 नव॰ तक
पूर्वाषाढ़ा 06:54, 14 नव॰ तक
योग
सुकर्मा 14:56 तक
धृति 15:53, 13 नव॰ तक
करण
वणिज 17:54 तक
विष्टि (भद्रा) 07:13, 13 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:10
सूर्यास्त
16:36
चंद्रोदय
10:58
चंद्रास्त
18:35
दिनमान
9h 26m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:13 – 06:12
अभिजीत मुहूर्त
11:34 – 12:12

अशुभ समय

राहुकाल
13:03 – 14:14
यमगंड
07:10 – 08:21
गुलिक काल
09:31 – 10:42

12 नवंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ07:10 – 08:21शुभ
रोग08:21 – 09:31टालें
उद्वेग09:31 – 10:42टालें
चर10:42 – 11:53सामान्य
लाभ11:53 – 13:03शुभ
अमृत13:03 – 14:14शुभ
काल14:14 – 15:25टालें
शुभ15:25 – 16:36शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत16:36 – 18:25शुभ
चर18:25 – 20:15सामान्य
रोग20:15 – 22:04टालें
काल22:04 – 23:53टालें
लाभ23:53 – 01:43शुभ
उद्वेग01:43 – 03:32टालें
शुभ03:32 – 05:22शुभ
अमृत05:22 – 07:11शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु07:1007:57दिन
मंगल07:5708:44दिन
सूर्य08:4409:31दिन
शुक्र09:3110:18दिन
बुध10:1811:06दिन
चंद्र11:0611:53दिन
शनि11:5312:40दिन
गुरु12:4013:27दिन
मंगल13:2714:14दिन
सूर्य14:1415:01दिन
शुक्र15:0115:48दिन
बुध15:4816:36दिन
चंद्र16:3617:49रात
शनि17:4919:02रात
गुरु19:0220:15रात
मंगल20:1521:28रात
सूर्य21:2822:41रात
शुक्र22:4123:53रात
बुध23:5301:06रात
चंद्र01:0602:19रात
शनि02:1903:32रात
गुरु03:3204:45रात
मंगल04:4505:58रात
सूर्य05:5807:11रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
12 नव॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 नव॰ 2026वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
20 नव॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 नव॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
23 नव॰ 2026कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
27 नव॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 दिस॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 दिस॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 दिस॰ 2026मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या

तिथियां सिएटल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2323° (लाहिड़ी)। समय सिएटल (America/Los_Angeles) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।