28 दिसंबर 2026 को सिएटल का पंचांग

सोमवार, 28 दिसंबर 2026, सिएटल, संयुक्त राज्य। समय America/Los_Angeles में है।

सोमवार, 28 दिसंबर 2026 को सिएटल में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (23:55 तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (02:13, 29 दिस॰ तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 07:57 पर और सूर्यास्त 16:24 पर है। राहुकाल 09:00 से 10:04 तक है।

दिन और रात
दिन 07:57 – 16:24
रात 07:57 तक
तिथि
षष्ठी, 23:55 तक
सप्तमी
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 02:13 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 दिसंबर 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 23:55 तक
कृष्ण सप्तमी 23:06, 29 दिस॰ तक
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी 02:13, 29 दिस॰ तक
उत्तरा फाल्गुनी 02:07, 30 दिस॰ तक
योग
आयुष्मान 02:00, 29 दिस॰ तक
सौभाग्य 00:11, 30 दिस॰ तक
करण
गर 12:36 तक
वणिज 23:55 तक
विष्टि (भद्रा) 11:25, 29 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:57
सूर्यास्त
16:24
चंद्रोदय
22:45
चंद्रास्त
10:54
दिनमान
8h 28m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:52 – 06:54
अभिजीत मुहूर्त
11:54 – 12:27

अशुभ समय

राहुकाल
09:00 – 10:04
यमगंड
11:07 – 12:11
गुलिक काल
13:14 – 14:18

28 दिसंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत07:57 – 09:00शुभ
काल09:00 – 10:04टालें
शुभ10:04 – 11:07शुभ
रोग11:07 – 12:11टालें
उद्वेग12:11 – 13:14टालें
चर13:14 – 14:18सामान्य
लाभ14:18 – 15:21शुभ
अमृत15:21 – 16:24शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर16:24 – 18:21सामान्य
रोग18:21 – 20:18टालें
काल20:18 – 22:14टालें
लाभ22:14 – 00:11शुभ
उद्वेग00:11 – 02:07टालें
शुभ02:07 – 04:04शुभ
अमृत04:04 – 06:00शुभ
चर06:00 – 07:57सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र07:5708:39दिन
शनि08:3909:21दिन
गुरु09:2110:04दिन
मंगल10:0410:46दिन
सूर्य10:4611:28दिन
शुक्र11:2812:11दिन
बुध12:1112:53दिन
चंद्र12:5313:35दिन
शनि13:3514:18दिन
गुरु14:1815:00दिन
मंगल15:0015:42दिन
सूर्य15:4216:24दिन
शुक्र16:2417:42रात
बुध17:4219:00रात
चंद्र19:0020:18रात
शनि20:1821:35रात
गुरु21:3522:53रात
मंगल22:5300:11रात
सूर्य00:1101:28रात
शुक्र01:2802:46रात
बुध02:4604:04रात
चंद्र04:0405:21रात
शनि05:2106:39रात
गुरु06:3907:57रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
30 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 जन॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 जन॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 जन॰ 2027पौष अमावस्याअमावस्या
11 जन॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2027मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
18 जन॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 जन॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
21 जन॰ 2027पौष पूर्णिमापूर्णिमा
25 जन॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां सिएटल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2341° (लाहिड़ी)। समय सिएटल (America/Los_Angeles) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।