22 अक्टूबर 2028 को सिएटल का पंचांग

रविवार, 22 अक्टूबर 2028, सिएटल, संयुक्त राज्य। समय America/Los_Angeles में है।

रविवार, 22 अक्टूबर 2028 को सिएटल में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (08:24 तक), नक्षत्र मूल (22:46 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 07:39 पर और सूर्यास्त 18:07 पर है। राहुकाल 16:48 से 18:07 तक है।

दिन और रात
दिन 07:39 – 18:07
रात 07:40 तक
तिथि
षष्ठी
नक्षत्र
मूल, 22:46 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 अक्टूबर 2028 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 08:24 तक
शुक्ल षष्ठी 08:23, 23 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मूल 22:46 तक
पूर्वाषाढ़ा 23:52, 23 अक्टू॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 23:46 तक
सुकर्मा 23:02, 23 अक्टू॰ तक
करण
बालव 08:24 तक
कौलव 20:17 तक
तैतिल 08:23, 23 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:39
सूर्यास्त
18:07
चंद्रोदय
13:14
चंद्रास्त
21:32
दिनमान
10h 28m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:51 – 06:45
अभिजीत मुहूर्त
12:32 – 13:14

अशुभ समय

राहुकाल
16:48 – 18:07
यमगंड
12:53 – 14:11
गुलिक काल
15:30 – 16:48

22 अक्टूबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग07:39 – 08:57टालें
चर08:57 – 10:16सामान्य
लाभ10:16 – 11:34शुभ
अमृत11:34 – 12:53शुभ
काल12:53 – 14:11टालें
शुभ14:11 – 15:30शुभ
रोग15:30 – 16:48टालें
उद्वेग16:48 – 18:07टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:07 – 19:48शुभ
अमृत19:48 – 21:30शुभ
चर21:30 – 23:12सामान्य
रोग23:12 – 00:54टालें
काल00:54 – 02:35टालें
लाभ02:35 – 04:17शुभ
उद्वेग04:17 – 05:59टालें
शुभ05:59 – 07:40शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य07:3908:31दिन
शुक्र08:3109:24दिन
बुध09:2410:16दिन
चंद्र10:1611:08दिन
शनि11:0812:01दिन
गुरु12:0112:53दिन
मंगल12:5313:45दिन
सूर्य13:4514:37दिन
शुक्र14:3715:30दिन
बुध15:3016:22दिन
चंद्र16:2217:14दिन
शनि17:1418:07दिन
गुरु18:0719:14रात
मंगल19:1420:22रात
सूर्य20:2221:30रात
शुक्र21:3022:38रात
बुध22:3823:46रात
चंद्र23:4600:54रात
शनि00:5402:01रात
गुरु02:0103:09रात
मंगल03:0904:17रात
सूर्य04:1705:25रात
शुक्र05:2506:33रात
बुध06:3307:40रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
28 अक्टू॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
30 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 नव॰ 2028कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
5 नव॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
9 नव॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
12 नव॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 नव॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
15 नव॰ 2028मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
15 नव॰ 2028वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
19 नव॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां सिएटल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2595° (लाहिड़ी)। समय सिएटल (America/Los_Angeles) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।