19 अप्रैल 2029 को सिएटल का पंचांग

गुरुवार, 19 अप्रैल 2029, सिएटल, संयुक्त राज्य। समय America/Los_Angeles में है।

गुरुवार, 19 अप्रैल 2029 को सिएटल में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (01:00, 20 अप्रैल तक), नक्षत्र आर्द्रा (04:16, 20 अप्रैल तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 06:12 पर और सूर्यास्त 20:05 पर है। राहुकाल 14:52 से 16:37 तक है।

दिन और रात
दिन 06:12 – 20:05
रात 06:10 तक
तिथि
षष्ठी, 01:00 तक
सप्तमी
नक्षत्र
आर्द्रा, 04:16 तक
पुनर्वसु
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

19 अप्रैल 2029 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 01:00, 20 अप्रैल तक
शुक्ल सप्तमी 01:04, 21 अप्रैल तक
नक्षत्र
आर्द्रा 04:16, 20 अप्रैल तक
पुनर्वसु 04:53, 21 अप्रैल तक
योग
अतिगंडअशुभ 17:05 तक
सुकर्मा 16:16, 20 अप्रैल तक
करण
कौलव 12:43 तक
तैतिल 01:00, 20 अप्रैल तक
गर 13:07, 20 अप्रैल तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमेष
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:12
सूर्यास्त
20:05
चंद्रोदय
09:43
चंद्रास्त
01:14
दिनमान
13h 53m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:51 – 05:31
अभिजीत मुहूर्त
12:41 – 13:36

अशुभ समय

राहुकाल
14:52 – 16:37
यमगंड
06:12 – 07:56
गुलिक काल
09:40 – 11:24

19 अप्रैल 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:12 – 07:56शुभ
रोग07:56 – 09:40टालें
उद्वेग09:40 – 11:24टालें
चर11:24 – 13:08सामान्य
लाभ13:08 – 14:52शुभ
अमृत14:52 – 16:37शुभ
काल16:37 – 18:21टालें
शुभ18:21 – 20:05शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत20:05 – 21:20शुभ
चर21:20 – 22:36सामान्य
रोग22:36 – 23:52टालें
काल23:52 – 01:07टालें
लाभ01:07 – 02:23शुभ
उद्वेग02:23 – 03:39टालें
शुभ03:39 – 04:54शुभ
अमृत04:54 – 06:10शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:1207:21दिन
मंगल07:2108:31दिन
सूर्य08:3109:40दिन
शुक्र09:4010:49दिन
बुध10:4911:59दिन
चंद्र11:5913:08दिन
शनि13:0814:18दिन
गुरु14:1815:27दिन
मंगल15:2716:37दिन
सूर्य16:3717:46दिन
शुक्र17:4618:55दिन
बुध18:5520:05दिन
चंद्र20:0520:55रात
शनि20:5521:46रात
गुरु21:4622:36रात
मंगल22:3623:27रात
सूर्य23:2700:17रात
शुक्र00:1701:07रात
बुध01:0701:58रात
चंद्र01:5802:48रात
शनि02:4803:39रात
गुरु03:3904:29रात
मंगल04:2905:19रात
सूर्य05:1906:10रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
24 अप्रैल 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
26 अप्रैल 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
27 अप्रैल 2029चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
1 मई 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
5 मई 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
8 मई 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
10 मई 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 मई 2029वैशाख अमावस्याअमावस्या
14 मई 2029वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
17 मई 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां सिएटल में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2663° (लाहिड़ी)। समय सिएटल (America/Los_Angeles) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।