16 मार्च 2026 को सिलचर का पंचांग

सोमवार, 16 मार्च 2026, सिलचर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 16 मार्च 2026 को सिलचर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (09:41 तक), नक्षत्र श्रवण (05:56 तक) और योग शिव है। सूर्योदय 05:27 पर और सूर्यास्त 17:28 पर है। राहुकाल 06:57 से 08:27 तक है।

दिन और रात
दिन 05:27 – 17:28
रात 05:26 तक
तिथि
द्वादशी, 09:41 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
धनिष्ठा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 मार्च 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 09:41 तक
कृष्ण त्रयोदशी 09:23, 17 मार्च तक
नक्षत्र
श्रवण 05:56 तक
धनिष्ठा 06:22, 17 मार्च तक
योग
शिव 09:36 तक
सिद्ध 08:15, 17 मार्च तक
करण
तैतिल 09:41 तक
गर 21:37 तक
वणिज 09:23, 17 मार्च तक
चंद्र राशि
मकर 18:14 तक
सूर्य राशिमीन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:27
सूर्यास्त
17:28
चंद्रोदय
03:37
चंद्रास्त
14:53
दिनमान
12h 1m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:51 – 04:39
अभिजीत मुहूर्त
11:03 – 11:51

अशुभ समय

राहुकाल
06:57 – 08:27
यमगंड
09:57 – 11:27
गुलिक काल
12:57 – 14:27

16 मार्च 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:27 – 06:57शुभ
काल06:57 – 08:27टालें
शुभ08:27 – 09:57शुभ
रोग09:57 – 11:27टालें
उद्वेग11:27 – 12:57टालें
चर12:57 – 14:27सामान्य
लाभ14:27 – 15:57शुभ
अमृत15:57 – 17:28शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:28 – 18:57सामान्य
रोग18:57 – 20:27टालें
काल20:27 – 21:57टालें
लाभ21:57 – 23:27शुभ
उद्वेग23:27 – 00:56टालें
शुभ00:56 – 02:26शुभ
अमृत02:26 – 03:56शुभ
चर03:56 – 05:26सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:2706:27दिन
शनि06:2707:27दिन
गुरु07:2708:27दिन
मंगल08:2709:27दिन
सूर्य09:2710:27दिन
शुक्र10:2711:27दिन
बुध11:2712:27दिन
चंद्र12:2713:27दिन
शनि13:2714:27दिन
गुरु14:2715:27दिन
मंगल15:2716:27दिन
सूर्य16:2717:28दिन
शुक्र17:2818:27रात
बुध18:2719:27रात
चंद्र19:2720:27रात
शनि20:2721:27रात
गुरु21:2722:27रात
मंगल22:2723:27रात
सूर्य23:2700:26रात
शुक्र00:2601:26रात
बुध01:2602:26रात
चंद्र02:2603:26रात
शनि03:2604:26रात
गुरु04:2605:26रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 मार्च 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
19 मार्च 2026चैत्र अमावस्याअमावस्या
22 मार्च 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 मार्च 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 मार्च 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 अप्रैल 2026चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
6 अप्रैल 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 अप्रैल 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 अप्रैल 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 अप्रैल 2026मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश

तिथियां सिलचर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2231° (लाहिड़ी)। समय सिलचर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।