4 अक्टूबर 2026 को सिलचर का पंचांग

रविवार, 4 अक्टूबर 2026, सिलचर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 4 अक्टूबर 2026 को सिलचर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (05:52 तक), नक्षत्र पुनर्वसु (00:14, 5 अक्टू॰ तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 05:11 पर और सूर्यास्त 17:02 पर है। राहुकाल 15:34 से 17:02 तक है।

दिन और रात
दिन 05:11 – 17:02
रात 05:12 तक
तिथि
नवमी, 03:54 तक
दशमी
नक्षत्र
पुनर्वसु, 00:14 तक
पुष्य
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 अक्टूबर 2026 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 05:52 तक
कृष्ण नवमी 03:54, 5 अक्टू॰ तक
कृष्ण दशमी 02:07, 6 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 00:14, 5 अक्टू॰ तक
पुष्य 23:09, 5 अक्टू॰ तक
योग
परिघअशुभ 12:32 तक
शिव 09:51, 5 अक्टू॰ तक
करण
कौलव 05:52 तक
तैतिल 16:51 तक
गर 03:54, 5 अक्टू॰ तक
वणिज 14:59, 5 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 18:32 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:11
सूर्यास्त
17:02
चंद्रोदय
23:39
चंद्रास्त
12:48
दिनमान
11h 51m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:34 – 04:23
अभिजीत मुहूर्त
10:43 – 11:31

अशुभ समय

राहुकाल
15:34 – 17:02
यमगंड
11:07 – 12:36
गुलिक काल
14:05 – 15:34

4 अक्टूबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:11 – 06:40टालें
चर06:40 – 08:09सामान्य
लाभ08:09 – 09:38शुभ
अमृत09:38 – 11:07शुभ
काल11:07 – 12:36टालें
शुभ12:36 – 14:05शुभ
रोग14:05 – 15:34टालें
उद्वेग15:34 – 17:02टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:02 – 18:34शुभ
अमृत18:34 – 20:05शुभ
चर20:05 – 21:36सामान्य
रोग21:36 – 23:07टालें
काल23:07 – 00:38टालें
लाभ00:38 – 02:09शुभ
उद्वेग02:09 – 03:41टालें
शुभ03:41 – 05:12शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:1106:11दिन
शुक्र06:1107:10दिन
बुध07:1008:09दिन
चंद्र08:0909:08दिन
शनि09:0810:08दिन
गुरु10:0811:07दिन
मंगल11:0712:06दिन
सूर्य12:0613:05दिन
शुक्र13:0514:05दिन
बुध14:0515:04दिन
चंद्र15:0416:03दिन
शनि16:0317:02दिन
गुरु17:0218:03रात
मंगल18:0319:04रात
सूर्य19:0420:05रात
शुक्र20:0521:06रात
बुध21:0622:06रात
चंद्र22:0623:07रात
शनि23:0700:08रात
गुरु00:0801:09रात
मंगल01:0902:09रात
सूर्य02:0903:10रात
शुक्र03:1004:11रात
बुध04:1105:12रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
4 अक्टू॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
6 अक्टू॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 अक्टू॰ 2026आश्विन अमावस्याअमावस्या
14 अक्टू॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2026तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
22 अक्टू॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 अक्टू॰ 2026आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
29 अक्टू॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 नव॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां सिलचर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2308° (लाहिड़ी)। समय सिलचर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।