26 जनवरी 2027 को सिलचर का पंचांग

मंगलवार, 26 जनवरी 2027, सिलचर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 26 जनवरी 2027 को सिलचर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (04:33, 27 जन॰ तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (00:06, 27 जन॰ तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 06:03 पर और सूर्यास्त 16:59 पर है। राहुकाल 14:15 से 15:37 तक है।

दिन और रात
दिन 06:03 – 16:59
रात 06:03 तक
तिथि
पंचमी, 04:33 तक
षष्ठी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 00:06 तक
हस्त
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

26 जनवरी 2027 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 04:33, 27 जन॰ तक
कृष्ण षष्ठी 03:54, 28 जन॰ तक
नक्षत्र
हस्त 23:56, 27 जन॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 20:18 तक
सुकर्मा 18:19, 27 जन॰ तक
करण
कौलव 17:11 तक
तैतिल 04:33, 27 जन॰ तक
गर 16:07, 27 जन॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 06:45 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:03
सूर्यास्त
16:59
चंद्रोदय
21:08
चंद्रास्त
08:33
दिनमान
10h 56m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:18 – 05:11
अभिजीत मुहूर्त
11:09 – 11:53

अशुभ समय

राहुकाल
14:15 – 15:37
यमगंड
08:47 – 10:09
गुलिक काल
11:31 – 12:53

26 जनवरी 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:03 – 07:25टालें
उद्वेग07:25 – 08:47टालें
चर08:47 – 10:09सामान्य
लाभ10:09 – 11:31शुभ
अमृत11:31 – 12:53शुभ
काल12:53 – 14:15टालें
शुभ14:15 – 15:37शुभ
रोग15:37 – 16:59टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल16:59 – 18:37टालें
लाभ18:37 – 20:15शुभ
उद्वेग20:15 – 21:53टालें
शुभ21:53 – 23:31शुभ
अमृत23:31 – 01:09शुभ
चर01:09 – 02:47सामान्य
रोग02:47 – 04:25टालें
काल04:25 – 06:03टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:0306:58दिन
सूर्य06:5807:52दिन
शुक्र07:5208:47दिन
बुध08:4709:42दिन
चंद्र09:4210:36दिन
शनि10:3611:31दिन
गुरु11:3112:25दिन
मंगल12:2513:20दिन
सूर्य13:2014:15दिन
शुक्र14:1515:09दिन
बुध15:0916:04दिन
चंद्र16:0416:59दिन
शनि16:5918:04रात
गुरु18:0419:09रात
मंगल19:0920:15रात
सूर्य20:1521:20रात
शुक्र21:2022:25रात
बुध22:2523:31रात
चंद्र23:3100:36रात
शनि00:3601:41रात
गुरु01:4102:47रात
मंगल02:4703:52रात
सूर्य03:5204:57रात
शुक्र04:5706:03रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 जन॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 फ़र॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 फ़र॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 फ़र॰ 2027माघ अमावस्याअमावस्या
10 फ़र॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
13 फ़र॰ 2027कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
17 फ़र॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
19 फ़र॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 फ़र॰ 2027माघ पूर्णिमापूर्णिमा
24 फ़र॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां सिलचर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2352° (लाहिड़ी)। समय सिलचर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।