15 फ़रवरी 2029 को सिलचर का पंचांग

गुरुवार, 15 फ़रवरी 2029, सिलचर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 15 फ़रवरी 2029 को सिलचर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (19:55 तक), नक्षत्र शतभिषा (06:05 तक) और योग शिव है। सूर्योदय 05:52 पर और सूर्यास्त 17:13 पर है। राहुकाल 12:58 से 14:23 तक है।

दिन और रात
दिन 05:52 – 17:13
रात 05:52 तक
तिथि
द्वितीया, 19:55 तक
तृतीया
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 फ़रवरी 2029 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 19:55 तक
शुक्ल तृतीया 22:17, 16 फ़र॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 06:05 तक
पूर्वा भाद्रपद 08:47, 16 फ़र॰ तक
योग
शिव 14:03 तक
सिद्ध 14:43, 16 फ़र॰ तक
करण
बालव 06:50 तक
कौलव 19:55 तक
तैतिल 09:05, 16 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 02:05, 16 फ़र॰ तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:52
सूर्यास्त
17:13
चंद्रोदय
06:37
चंद्रास्त
18:54
दिनमान
11h 20m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:11 – 05:02
अभिजीत मुहूर्त
11:10 – 11:55

अशुभ समय

राहुकाल
12:58 – 14:23
यमगंड
05:52 – 07:17
गुलिक काल
08:43 – 10:08

15 फ़रवरी 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:52 – 07:17शुभ
रोग07:17 – 08:43टालें
उद्वेग08:43 – 10:08टालें
चर10:08 – 11:33सामान्य
लाभ11:33 – 12:58शुभ
अमृत12:58 – 14:23शुभ
काल14:23 – 15:48टालें
शुभ15:48 – 17:13शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:13 – 18:48शुभ
चर18:48 – 20:22सामान्य
रोग20:22 – 21:57टालें
काल21:57 – 23:32टालें
लाभ23:32 – 01:07शुभ
उद्वेग01:07 – 02:42टालें
शुभ02:42 – 04:17शुभ
अमृत04:17 – 05:52शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:5206:49दिन
मंगल06:4907:46दिन
सूर्य07:4608:43दिन
शुक्र08:4309:39दिन
बुध09:3910:36दिन
चंद्र10:3611:33दिन
शनि11:3312:29दिन
गुरु12:2913:26दिन
मंगल13:2614:23दिन
सूर्य14:2315:19दिन
शुक्र15:1916:16दिन
बुध16:1617:13दिन
चंद्र17:1318:16रात
शनि18:1619:19रात
गुरु19:1920:22रात
मंगल20:2221:26रात
सूर्य21:2622:29रात
शुक्र22:2923:32रात
बुध23:3200:35रात
चंद्र00:3501:39रात
शनि01:3902:42रात
गुरु02:4203:45रात
मंगल03:4504:48रात
सूर्य04:4805:52रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 फ़र॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 फ़र॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
26 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 फ़र॰ 2029फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
4 मार्च 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 मार्च 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 मार्च 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 मार्च 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 मार्च 2029मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
15 मार्च 2029चैत्र अमावस्याअमावस्या

तिथियां सिलचर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2639° (लाहिड़ी)। समय सिलचर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।