5 जुलाई 2026 को सिंगापुर का पंचांग

रविवार, 5 जुलाई 2026, सिंगापुर, सिंगापुर। समय Asia/Singapore में है।

रविवार, 5 जुलाई 2026 को सिंगापुर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (16:01 तक), नक्षत्र शतभिषा (17:42 तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 07:03 पर और सूर्यास्त 19:15 पर है। राहुकाल 17:43 से 19:15 तक है।

दिन और रात
दिन 07:03 – 19:15
रात 07:03 तक
तिथि
पंचमी, 16:01 तक
षष्ठी
नक्षत्र
शतभिषा, 17:42 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 जुलाई 2026 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 16:01 तक
कृष्ण षष्ठी 16:17, 6 जुल॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 17:42 तक
पूर्वा भाद्रपद 18:37, 6 जुल॰ तक
योग
आयुष्मान 19:10 तक
सौभाग्य 18:21, 6 जुल॰ तक
करण
तैतिल 16:01 तक
गर 04:14, 6 जुल॰ तक
वणिज 16:17, 6 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:03
सूर्यास्त
19:15
चंद्रोदय
23:21
चंद्रास्त
10:58
दिनमान
12h 12m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:28 – 06:16
अभिजीत मुहूर्त
12:44 – 13:33

अशुभ समय

राहुकाल
17:43 – 19:15
यमगंड
13:09 – 14:40
गुलिक काल
16:12 – 17:43

5 जुलाई 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग07:03 – 08:34टालें
चर08:34 – 10:06सामान्य
लाभ10:06 – 11:37शुभ
अमृत11:37 – 13:09शुभ
काल13:09 – 14:40टालें
शुभ14:40 – 16:12शुभ
रोग16:12 – 17:43टालें
उद्वेग17:43 – 19:15टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:15 – 20:43शुभ
अमृत20:43 – 22:12शुभ
चर22:12 – 23:40सामान्य
रोग23:40 – 01:09टालें
काल01:09 – 02:37टालें
लाभ02:37 – 04:06शुभ
उद्वेग04:06 – 05:35टालें
शुभ05:35 – 07:03शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य07:0308:04दिन
शुक्र08:0409:05दिन
बुध09:0510:06दिन
चंद्र10:0611:07दिन
शनि11:0712:08दिन
गुरु12:0813:09दिन
मंगल13:0914:10दिन
सूर्य14:1015:11दिन
शुक्र15:1116:12दिन
बुध16:1217:13दिन
चंद्र17:1318:14दिन
शनि18:1419:15दिन
गुरु19:1520:14रात
मंगल20:1421:13रात
सूर्य21:1322:12रात
शुक्र22:1223:11रात
बुध23:1100:10रात
चंद्र00:1001:09रात
शनि01:0902:08रात
गुरु02:0803:07रात
मंगल03:0704:06रात
सूर्य04:0605:05रात
शुक्र05:0506:04रात
बुध06:0407:03रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 जुल॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
11 जुल॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 जुल॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 जुल॰ 2026आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
17 जुल॰ 2026कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुल॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 जुल॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 जुल॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
29 जुल॰ 2026आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
2 अग॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां सिंगापुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2273° (लाहिड़ी)। समय सिंगापुर (Asia/Singapore) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।