7 सितंबर 2026 को सिंगापुर का पंचांग

सोमवार, 7 सितंबर 2026, सिंगापुर, सिंगापुर। समय Asia/Singapore में है।

सोमवार, 7 सितंबर 2026 को सिंगापुर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण एकादशी (19:34 तक), नक्षत्र पुनर्वसु (20:44 तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 06:59 पर और सूर्यास्त 19:06 पर है। राहुकाल 08:29 से 10:00 तक है।

दिन और रात
दिन 06:59 – 19:06
रात 06:58 तक
तिथि
एकादशी, 19:34 तक
द्वादशी
नक्षत्र
पुनर्वसु, 20:44 तक
पुष्य
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

7 सितंबर 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 19:34 तक
कृष्ण द्वादशी 17:13, 8 सित॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 19:09, 8 सित॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 09:11 तक
वरीयान 06:08, 8 सित॰ तक
परिघअशुभ 03:10, 9 सित॰ तक
करण
बव 08:46 तक
बालव 19:34 तक
कौलव 06:23, 8 सित॰ तक
तैतिल 17:13, 8 सित॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 15:08 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:59
सूर्यास्त
19:06
चंद्रोदय
03:15
चंद्रास्त
15:49
दिनमान
12h 8m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:24 – 06:11
अभिजीत मुहूर्त
12:38 – 13:27

अशुभ समय

राहुकाल
08:29 – 10:00
यमगंड
11:31 – 13:02
गुलिक काल
14:33 – 16:04

7 सितंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:59 – 08:29शुभ
काल08:29 – 10:00टालें
शुभ10:00 – 11:31शुभ
रोग11:31 – 13:02टालें
उद्वेग13:02 – 14:33टालें
चर14:33 – 16:04सामान्य
लाभ16:04 – 17:35शुभ
अमृत17:35 – 19:06शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर19:06 – 20:35सामान्य
रोग20:35 – 22:04टालें
काल22:04 – 23:33टालें
लाभ23:33 – 01:02शुभ
उद्वेग01:02 – 02:31टालें
शुभ02:31 – 04:00शुभ
अमृत04:00 – 05:29शुभ
चर05:29 – 06:58सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:5907:59दिन
शनि07:5909:00दिन
गुरु09:0010:00दिन
मंगल10:0011:01दिन
सूर्य11:0112:02दिन
शुक्र12:0213:02दिन
बुध13:0214:03दिन
चंद्र14:0315:04दिन
शनि15:0416:04दिन
गुरु16:0417:05दिन
मंगल17:0518:06दिन
सूर्य18:0619:06दिन
शुक्र19:0620:05रात
बुध20:0521:05रात
चंद्र21:0522:04रात
शनि22:0423:04रात
गुरु23:0400:03रात
मंगल00:0301:02रात
सूर्य01:0202:02रात
शुक्र02:0203:01रात
बुध03:0104:00रात
चंद्र04:0005:00रात
शनि05:0005:59रात
गुरु05:5906:58रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
7 सित॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
9 सित॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
11 सित॰ 2026भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
15 सित॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 सित॰ 2026कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
22 सित॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 सित॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 सित॰ 2026भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
30 सित॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 अक्टू॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
6 अक्टू॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां सिंगापुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2298° (लाहिड़ी)। समय सिंगापुर (Asia/Singapore) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।