1 नवंबर 2029 को सिंगापुर का पंचांग

गुरुवार, 1 नवंबर 2029, सिंगापुर, सिंगापुर। समय Asia/Singapore में है।

गुरुवार, 1 नवंबर 2029 को सिंगापुर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (04:52, 2 नव॰ तक), नक्षत्र मघा (01:17, 2 नव॰ तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 06:46 पर और सूर्यास्त 18:50 पर है। राहुकाल 14:18 से 15:49 तक है।

दिन और रात
दिन 06:46 – 18:50
रात 06:46 तक
तिथि
दशमी, 04:52 तक
एकादशी
नक्षत्र
मघा, 01:17 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 नवंबर 2029 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण दशमी 04:52, 2 नव॰ तक
कृष्ण एकादशी 02:28, 3 नव॰ तक
नक्षत्र
मघा 01:17, 2 नव॰ तक
योग
शुक्ल 11:24 तक
ब्रह्म 08:45, 2 नव॰ तक
करण
वणिज 17:48 तक
विष्टि (भद्रा) 04:52, 2 नव॰ तक
बव 15:45, 2 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:46
सूर्यास्त
18:50
चंद्रोदय
02:03
चंद्रास्त
14:28
दिनमान
12h 4m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:10 – 05:58
अभिजीत मुहूर्त
12:24 – 13:12

अशुभ समय

राहुकाल
14:18 – 15:49
यमगंड
06:46 – 08:16
गुलिक काल
09:47 – 11:17

1 नवंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:46 – 08:16शुभ
रोग08:16 – 09:47टालें
उद्वेग09:47 – 11:17टालें
चर11:17 – 12:48सामान्य
लाभ12:48 – 14:18शुभ
अमृत14:18 – 15:49शुभ
काल15:49 – 17:19टालें
शुभ17:19 – 18:50शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:50 – 20:19शुभ
चर20:19 – 21:49सामान्य
रोग21:49 – 23:18टालें
काल23:18 – 00:48टालें
लाभ00:48 – 02:17शुभ
उद्वेग02:17 – 03:47टालें
शुभ03:47 – 05:16शुभ
अमृत05:16 – 06:46शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:4607:46दिन
मंगल07:4608:46दिन
सूर्य08:4609:47दिन
शुक्र09:4710:47दिन
बुध10:4711:47दिन
चंद्र11:4712:48दिन
शनि12:4813:48दिन
गुरु13:4814:48दिन
मंगल14:4815:49दिन
सूर्य15:4916:49दिन
शुक्र16:4917:49दिन
बुध17:4918:50दिन
चंद्र18:5019:49रात
शनि19:4920:49रात
गुरु20:4921:49रात
मंगल21:4922:48रात
सूर्य22:4823:48रात
शुक्र23:4800:48रात
बुध00:4801:47रात
चंद्र01:4702:47रात
शनि02:4703:47रात
गुरु03:4704:46रात
मंगल04:4605:46रात
सूर्य05:4606:46रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 नव॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 नव॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 नव॰ 2029कार्तिक अमावस्याअमावस्या
9 नव॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 नव॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 नव॰ 2029वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
21 नव॰ 2029कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
25 नव॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 नव॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां सिंगापुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2738° (लाहिड़ी)। समय सिंगापुर (Asia/Singapore) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।