7 नवंबर 2027 को सोलापुर का पंचांग

रविवार, 7 नवंबर 2027, सोलापुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 7 नवंबर 2027 को सोलापुर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (05:24, 8 नव॰ तक), नक्षत्र धनिष्ठा (00:30, 8 नव॰ तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 06:27 पर और सूर्यास्त 17:52 पर है। राहुकाल 16:26 से 17:52 तक है।

दिन और रात
दिन 06:27 – 17:52
रात 06:27 तक
तिथि
नवमी, 05:24 तक
दशमी
नक्षत्र
धनिष्ठा, 00:30 तक
शतभिषा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

7 नवंबर 2027 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल नवमी 05:24, 8 नव॰ तक
शुक्ल दशमी 07:35, 9 नव॰ तक
नक्षत्र
धनिष्ठा 00:30, 8 नव॰ तक
शतभिषा 03:14, 9 नव॰ तक
योग
वृद्धि 22:50 तक
ध्रुव 23:32, 8 नव॰ तक
करण
बालव 16:09 तक
कौलव 05:24, 8 नव॰ तक
तैतिल 18:33, 8 नव॰ तक
चंद्र राशि
मकर 10:59 तक
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:27
सूर्यास्त
17:52
चंद्रोदय
13:24
चंद्रास्त
00:29
दिनमान
11h 25m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:46 – 05:37
अभिजीत मुहूर्त
11:47 – 12:32

अशुभ समय

राहुकाल
16:26 – 17:52
यमगंड
12:09 – 13:35
गुलिक काल
15:01 – 16:26

7 नवंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:27 – 07:53टालें
चर07:53 – 09:18सामान्य
लाभ09:18 – 10:44शुभ
अमृत10:44 – 12:09शुभ
काल12:09 – 13:35टालें
शुभ13:35 – 15:01शुभ
रोग15:01 – 16:26टालें
उद्वेग16:26 – 17:52टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:52 – 19:26शुभ
अमृत19:26 – 21:01शुभ
चर21:01 – 22:35सामान्य
रोग22:35 – 00:10टालें
काल00:10 – 01:44टालें
लाभ01:44 – 03:19शुभ
उद्वेग03:19 – 04:53टालें
शुभ04:53 – 06:27शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:2707:24दिन
शुक्र07:2408:21दिन
बुध08:2109:18दिन
चंद्र09:1810:15दिन
शनि10:1511:12दिन
गुरु11:1212:09दिन
मंगल12:0913:06दिन
सूर्य13:0614:04दिन
शुक्र14:0415:01दिन
बुध15:0115:58दिन
चंद्र15:5816:55दिन
शनि16:5517:52दिन
गुरु17:5218:55रात
मंगल18:5519:58रात
सूर्य19:5821:01रात
शुक्र21:0122:04रात
बुध22:0423:07रात
चंद्र23:0700:10रात
शनि00:1001:13रात
गुरु01:1302:16रात
मंगल02:1603:19रात
सूर्य03:1904:22रात
शुक्र04:2205:25रात
बुध05:2506:27रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 नव॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 नव॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 नव॰ 2027कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
17 नव॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 नव॰ 2027वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
21 नव॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 नव॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 नव॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
28 नव॰ 2027मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
2 दिस॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां सोलापुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2461° (लाहिड़ी)। समय सोलापुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।