11 सितंबर 2029 को सोलापुर का पंचांग

मंगलवार, 11 सितंबर 2029, सोलापुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 11 सितंबर 2029 को सोलापुर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (02:57, 12 सित॰ तक), नक्षत्र चित्रा (16:25 तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 06:13 पर और सूर्यास्त 18:31 पर है। राहुकाल 15:27 से 16:59 तक है।

दिन और रात
दिन 06:13 – 18:31
रात 06:13 तक
तिथि
चतुर्थी, 02:57 तक
पंचमी
नक्षत्र
चित्रा, 16:25 तक
स्वाति
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 सितंबर 2029 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 02:57, 12 सित॰ तक
शुक्ल पंचमी 00:05, 13 सित॰ तक
नक्षत्र
चित्रा 16:25 तक
स्वाति 14:10, 12 सित॰ तक
योग
ब्रह्म 19:23 तक
इंद्र 15:49, 12 सित॰ तक
करण
वणिज 16:31 तक
विष्टि (भद्रा) 02:57, 12 सित॰ तक
बव 13:28, 12 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:13
सूर्यास्त
18:31
चंद्रोदय
08:54
चंद्रास्त
20:39
दिनमान
12h 18m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:40 – 05:27
अभिजीत मुहूर्त
11:58 – 12:47

अशुभ समय

राहुकाल
15:27 – 16:59
यमगंड
09:18 – 10:50
गुलिक काल
12:22 – 13:55

11 सितंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:13 – 07:46टालें
उद्वेग07:46 – 09:18टालें
चर09:18 – 10:50सामान्य
लाभ10:50 – 12:22शुभ
अमृत12:22 – 13:55शुभ
काल13:55 – 15:27टालें
शुभ15:27 – 16:59शुभ
रोग16:59 – 18:31टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:31 – 19:59टालें
लाभ19:59 – 21:27शुभ
उद्वेग21:27 – 22:55टालें
शुभ22:55 – 00:22शुभ
अमृत00:22 – 01:50शुभ
चर01:50 – 03:18सामान्य
रोग03:18 – 04:46टालें
काल04:46 – 06:13टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:1307:15दिन
सूर्य07:1508:16दिन
शुक्र08:1609:18दिन
बुध09:1810:19दिन
चंद्र10:1911:21दिन
शनि11:2112:22दिन
गुरु12:2213:24दिन
मंगल13:2414:25दिन
सूर्य14:2515:27दिन
शुक्र15:2716:28दिन
बुध16:2817:30दिन
चंद्र17:3018:31दिन
शनि18:3119:30रात
गुरु19:3020:28रात
मंगल20:2821:27रात
सूर्य21:2722:25रात
शुक्र22:2523:24रात
बुध23:2400:22रात
चंद्र00:2201:21रात
शनि01:2102:19रात
गुरु02:1903:18रात
मंगल03:1804:16रात
सूर्य04:1605:15रात
शुक्र05:1506:13रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 सित॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 सित॰ 2029कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
18 सित॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 सित॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 सित॰ 2029भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
26 सित॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 अक्टू॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2029आश्विन अमावस्याअमावस्या

तिथियां सोलापुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2719° (लाहिड़ी)। समय सोलापुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।