18 नवंबर 2026 को श्रीनगर का पंचांग

बुधवार, 18 नवंबर 2026, श्रीनगर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 18 नवंबर 2026 को श्रीनगर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (07:06, 19 नव॰ तक), नक्षत्र शतभिषा (06:10, 19 नव॰ तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 07:05 पर और सूर्यास्त 17:25 पर है। राहुकाल 12:15 से 13:33 तक है।

दिन और रात
दिन 07:05 – 17:25
रात 07:06 तक
तिथि
नवमी, 07:06 तक
नक्षत्र
शतभिषा, 06:10 तक
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 नवंबर 2026 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल नवमी 07:06, 19 नव॰ तक
शुक्ल दशमी 07:16, 20 नव॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 06:10, 19 नव॰ तक
पूर्वा भाद्रपद 06:56, 20 नव॰ तक
योग
ध्रुव 08:05 तक
व्याघातअशुभ 07:42, 19 नव॰ तक
करण
बालव 18:42 तक
कौलव 07:06, 19 नव॰ तक
तैतिल 19:18, 19 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:05
सूर्यास्त
17:25
चंद्रोदय
13:33
चंद्रास्त
00:13
दिनमान
10h 20m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:16 – 06:11
अभिजीत मुहूर्त
11:55 – 12:36 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:15 – 13:33
यमगंड
08:23 – 09:40
गुलिक काल
10:58 – 12:15

18 नवंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ07:05 – 08:23शुभ
अमृत08:23 – 09:40शुभ
काल09:40 – 10:58टालें
शुभ10:58 – 12:15शुभ
रोग12:15 – 13:33टालें
उद्वेग13:33 – 14:50टालें
चर14:50 – 16:08सामान्य
लाभ16:08 – 17:25शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:25 – 19:08टालें
शुभ19:08 – 20:50शुभ
अमृत20:50 – 22:33शुभ
चर22:33 – 00:16सामान्य
रोग00:16 – 01:58टालें
काल01:58 – 03:41टालें
लाभ03:41 – 05:24शुभ
उद्वेग05:24 – 07:06टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध07:0507:57दिन
चंद्र07:5708:49दिन
शनि08:4909:40दिन
गुरु09:4010:32दिन
मंगल10:3211:24दिन
सूर्य11:2412:15दिन
शुक्र12:1513:07दिन
बुध13:0713:59दिन
चंद्र13:5914:50दिन
शनि14:5015:42दिन
गुरु15:4216:33दिन
मंगल16:3317:25दिन
सूर्य17:2518:33रात
शुक्र18:3319:42रात
बुध19:4220:50रात
चंद्र20:5021:59रात
शनि21:5923:07रात
गुरु23:0700:16रात
मंगल00:1601:24रात
सूर्य01:2402:33रात
शुक्र02:3303:41रात
बुध03:4104:50रात
चंद्र04:5005:58रात
शनि05:5807:06रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 नव॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 नव॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
24 नव॰ 2026कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
27 नव॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 दिस॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 दिस॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 दिस॰ 2026मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
13 दिस॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 दिस॰ 2026धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश

तिथियां श्रीनगर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2325° (लाहिड़ी)। समय श्रीनगर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।