7 सितंबर 2028 को श्रीनगर का पंचांग

गुरुवार, 7 सितंबर 2028, श्रीनगर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 7 सितंबर 2028 को श्रीनगर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (12:26 तक), नक्षत्र रेवती (18:36 तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 06:08 पर और सूर्यास्त 18:48 पर है। राहुकाल 14:03 से 15:38 तक है।

दिन और रात
दिन 06:08 – 18:48
रात 06:09 तक
तिथि
तृतीया, 12:26 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
रेवती, 18:36 तक
अश्विनी
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

7 सितंबर 2028 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 12:26 तक
कृष्ण चतुर्थी 14:30, 8 सित॰ तक
नक्षत्र
रेवती 18:36 तक
अश्विनी 21:09, 8 सित॰ तक
योग
वृद्धि 04:46, 8 सित॰ तक
ध्रुव 05:14, 9 सित॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 12:26 तक
बव 01:30, 8 सित॰ तक
बालव 14:30, 8 सित॰ तक
चंद्र राशि
मीन 18:36 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:08
सूर्यास्त
18:48
चंद्रोदय
20:07
चंद्रास्त
09:01
दिनमान
12h 40m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:38 – 05:23
अभिजीत मुहूर्त
12:03 – 12:53

अशुभ समय

राहुकाल
14:03 – 15:38
यमगंड
06:08 – 07:43
गुलिक काल
09:18 – 10:53

7 सितंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:08 – 07:43शुभ
रोग07:43 – 09:18टालें
उद्वेग09:18 – 10:53टालें
चर10:53 – 12:28सामान्य
लाभ12:28 – 14:03शुभ
अमृत14:03 – 15:38शुभ
काल15:38 – 17:13टालें
शुभ17:13 – 18:48शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:48 – 20:13शुभ
चर20:13 – 21:38सामान्य
रोग21:38 – 23:03टालें
काल23:03 – 00:28टालें
लाभ00:28 – 01:53शुभ
उद्वेग01:53 – 03:19टालें
शुभ03:19 – 04:44शुभ
अमृत04:44 – 06:09शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:0807:11दिन
मंगल07:1108:15दिन
सूर्य08:1509:18दिन
शुक्र09:1810:21दिन
बुध10:2111:25दिन
चंद्र11:2512:28दिन
शनि12:2813:31दिन
गुरु13:3114:35दिन
मंगल14:3515:38दिन
सूर्य15:3816:41दिन
शुक्र16:4117:44दिन
बुध17:4418:48दिन
चंद्र18:4819:44रात
शनि19:4420:41रात
गुरु20:4121:38रात
मंगल21:3822:35रात
सूर्य22:3523:31रात
शुक्र23:3100:28रात
बुध00:2801:25रात
चंद्र01:2502:22रात
शनि02:2203:19रात
गुरु03:1904:15रात
मंगल04:1505:12रात
सूर्य05:1206:09रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 सित॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 सित॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 सित॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 सित॰ 2028कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
17 सित॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
18 सित॰ 2028आश्विन अमावस्याअमावस्या
22 सित॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 सित॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 अक्टू॰ 2028आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां श्रीनगर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2577° (लाहिड़ी)। समय श्रीनगर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।