17 जनवरी 2027 को सूरत का पंचांग

रविवार, 17 जनवरी 2027, सूरत, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 17 जनवरी 2027 को सूरत में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (12:27 तक), नक्षत्र भरणी (22:42 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 07:18 पर और सूर्यास्त 18:18 पर है। राहुकाल 16:56 से 18:18 तक है।

दिन और रात
दिन 07:18 – 18:18
रात 07:18 तक
तिथि
नवमी, 12:27 तक
दशमी
नक्षत्र
भरणी, 22:42 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 जनवरी 2027 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल नवमी 12:27 तक
शुक्ल दशमी 10:27, 18 जन॰ तक
नक्षत्र
भरणी 22:42 तक
कृत्तिका 21:05, 18 जन॰ तक
योग
साध्य 12:23 तक
शुभ 09:33, 18 जन॰ तक
करण
कौलव 12:27 तक
तैतिल 23:32 तक
गर 10:27, 18 जन॰ तक
चंद्र राशि
मेष 04:21, 18 जन॰ तक
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:18
सूर्यास्त
18:18
चंद्रोदय
13:03
चंद्रास्त
01:43
दिनमान
11h 0m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:34 – 06:26
अभिजीत मुहूर्त
12:26 – 13:10

अशुभ समय

राहुकाल
16:56 – 18:18
यमगंड
12:48 – 14:11
गुलिक काल
15:33 – 16:56

17 जनवरी 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग07:18 – 08:41टालें
चर08:41 – 10:03सामान्य
लाभ10:03 – 11:26शुभ
अमृत11:26 – 12:48शुभ
काल12:48 – 14:11टालें
शुभ14:11 – 15:33शुभ
रोग15:33 – 16:56टालें
उद्वेग16:56 – 18:18टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:18 – 19:56शुभ
अमृत19:56 – 21:33शुभ
चर21:33 – 23:11सामान्य
रोग23:11 – 00:48टालें
काल00:48 – 02:26टालें
लाभ02:26 – 04:03शुभ
उद्वेग04:03 – 05:41टालें
शुभ05:41 – 07:18शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य07:1808:13दिन
शुक्र08:1309:08दिन
बुध09:0810:03दिन
चंद्र10:0310:58दिन
शनि10:5811:53दिन
गुरु11:5312:48दिन
मंगल12:4813:43दिन
सूर्य13:4314:38दिन
शुक्र14:3815:33दिन
बुध15:3316:28दिन
चंद्र16:2817:23दिन
शनि17:2318:18दिन
गुरु18:1819:23रात
मंगल19:2320:28रात
सूर्य20:2821:33रात
शुक्र21:3322:38रात
बुध22:3823:43रात
चंद्र23:4300:48रात
शनि00:4801:53रात
गुरु01:5302:58रात
मंगल02:5804:03रात
सूर्य04:0305:08रात
शुक्र05:0806:13रात
बुध06:1307:18रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
19 जन॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 जन॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 जन॰ 2027पौष पूर्णिमापूर्णिमा
25 जन॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 जन॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 फ़र॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 फ़र॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 फ़र॰ 2027माघ अमावस्याअमावस्या
10 फ़र॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
13 फ़र॰ 2027कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश

तिथियां सूरत में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2348° (लाहिड़ी)। समय सूरत (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।