29 सितंबर 2025 को सुवा का पंचांग

सोमवार, 29 सितंबर 2025, सुवा, फ़िजी। समय Pacific/Fiji में है।

सोमवार, 29 सितंबर 2025 को सुवा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (23:02 तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (10:25 तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 05:50 पर और सूर्यास्त 18:03 पर है। राहुकाल 07:21 से 08:53 तक है।

दिन और रात
दिन 05:50 – 18:03
रात 05:49 तक
तिथि
सप्तमी, 23:02 तक
अष्टमी
नक्षत्र
ज्येष्ठा, 10:25 तक
मूल
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 सितंबर 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 23:02 तक
शुक्ल अष्टमी 00:36, 1 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मूल 12:47, 30 सित॰ तक
योग
आयुष्मान 07:02 तक
सौभाग्य 07:30, 30 सित॰ तक
करण
गर 10:03 तक
वणिज 23:02 तक
विष्टि (भद्रा) 11:53, 30 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:50
सूर्यास्त
18:03
चंद्रोदय
10:27
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
12h 13m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:15 – 05:03
अभिजीत मुहूर्त
11:32 – 12:21

अशुभ समय

राहुकाल
07:21 – 08:53
यमगंड
10:25 – 11:56
गुलिक काल
13:28 – 15:00

29 सितंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:50 – 07:21शुभ
काल07:21 – 08:53टालें
शुभ08:53 – 10:25शुभ
रोग10:25 – 11:56टालें
उद्वेग11:56 – 13:28टालें
चर13:28 – 15:00सामान्य
लाभ15:00 – 16:31शुभ
अमृत16:31 – 18:03शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:03 – 19:31सामान्य
रोग19:31 – 20:59टालें
काल20:59 – 22:28टालें
लाभ22:28 – 23:56शुभ
उद्वेग23:56 – 01:24टालें
शुभ01:24 – 02:52शुभ
अमृत02:52 – 04:21शुभ
चर04:21 – 05:49सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:5006:51दिन
शनि06:5107:52दिन
गुरु07:5208:53दिन
मंगल08:5309:54दिन
सूर्य09:5410:55दिन
शुक्र10:5511:56दिन
बुध11:5612:57दिन
चंद्र12:5713:59दिन
शनि13:5915:00दिन
गुरु15:0016:01दिन
मंगल16:0117:02दिन
सूर्य17:0218:03दिन
शुक्र18:0319:02रात
बुध19:0220:01रात
चंद्र20:0120:59रात
शनि20:5921:58रात
गुरु21:5822:57रात
मंगल22:5723:56रात
सूर्य23:5600:55रात
शुक्र00:5501:54रात
बुध01:5402:52रात
चंद्र02:5203:51रात
शनि03:5104:50रात
गुरु04:5005:49रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 अक्टू॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2025आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
10 अक्टू॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 अक्टू॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 अक्टू॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 अक्टू॰ 2025तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 अक्टू॰ 2025कार्तिक अमावस्याअमावस्या
26 अक्टू॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां सुवा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2167° (लाहिड़ी)। समय सुवा (Pacific/Fiji) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।