25 सितंबर 2026 को सुवा का पंचांग

शुक्रवार, 25 सितंबर 2026, सुवा, फ़िजी। समय Pacific/Fiji में है।

शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को सुवा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (05:37, 26 सित॰ तक), नक्षत्र शतभिषा (17:52 तक) और योग शूल है। सूर्योदय 05:53 पर और सूर्यास्त 18:02 पर है। राहुकाल 10:27 से 11:58 तक है।

दिन और रात
दिन 05:53 – 18:02
रात 05:52 तक
तिथि
चतुर्दशी, 05:37 तक
नक्षत्र
शतभिषा, 17:52 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 सितंबर 2026 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 05:37, 26 सित॰ तक
पूर्णिमा 04:48, 27 सित॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 17:52 तक
पूर्वा भाद्रपद 18:02, 26 सित॰ तक
योग
शूलअशुभ 21:21 तक
गंडअशुभ 19:47, 26 सित॰ तक
करण
गर 17:47 तक
वणिज 05:37, 26 सित॰ तक
विष्टि (भद्रा) 17:17, 26 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:53
सूर्यास्त
18:02
चंद्रोदय
16:41
चंद्रास्त
04:36
दिनमान
12h 9m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:19 – 05:06
अभिजीत मुहूर्त
11:33 – 12:22

अशुभ समय

राहुकाल
10:27 – 11:58
यमगंड
15:00 – 16:31
गुलिक काल
07:24 – 08:56

25 सितंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:53 – 07:24सामान्य
लाभ07:24 – 08:56शुभ
अमृत08:56 – 10:27शुभ
काल10:27 – 11:58टालें
शुभ11:58 – 13:29शुभ
रोग13:29 – 15:00टालें
उद्वेग15:00 – 16:31टालें
चर16:31 – 18:02सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:02 – 19:31टालें
काल19:31 – 21:00टालें
लाभ21:00 – 22:29शुभ
उद्वेग22:29 – 23:57टालें
शुभ23:57 – 01:26शुभ
अमृत01:26 – 02:55शुभ
चर02:55 – 04:24सामान्य
रोग04:24 – 05:52टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:5306:54दिन
बुध06:5407:55दिन
चंद्र07:5508:56दिन
शनि08:5609:56दिन
गुरु09:5610:57दिन
मंगल10:5711:58दिन
सूर्य11:5812:59दिन
शुक्र12:5913:59दिन
बुध13:5915:00दिन
चंद्र15:0016:01दिन
शनि16:0117:01दिन
गुरु17:0118:02दिन
मंगल18:0219:01रात
सूर्य19:0120:01रात
शुक्र20:0121:00रात
बुध21:0021:59रात
चंद्र21:5922:58रात
शनि22:5823:57रात
गुरु23:5700:57रात
मंगल00:5701:56रात
सूर्य01:5602:55रात
शुक्र02:5503:54रात
बुध03:5404:53रात
चंद्र04:5305:52रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
26 सित॰ 2026भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
30 सित॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 अक्टू॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
7 अक्टू॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 अक्टू॰ 2026आश्विन अमावस्याअमावस्या
15 अक्टू॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
18 अक्टू॰ 2026तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
22 अक्टू॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां सुवा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2305° (लाहिड़ी)। समय सुवा (Pacific/Fiji) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।