30 सितंबर 2026 को सुवा का पंचांग

बुधवार, 30 सितंबर 2026, सुवा, फ़िजी। समय Pacific/Fiji में है।

बुधवार, 30 सितंबर 2026 को सुवा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्थी (21:25 तक), नक्षत्र भरणी (14:06 तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 05:49 पर और सूर्यास्त 18:03 पर है। राहुकाल 11:56 से 13:28 तक है।

दिन और रात
दिन 05:49 – 18:03
रात 05:48 तक
तिथि
चतुर्थी, 21:25 तक
पंचमी
नक्षत्र
भरणी, 14:06 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 सितंबर 2026 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 21:25 तक
कृष्ण पंचमी 19:05, 1 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
भरणी 14:06 तक
कृत्तिका 12:32, 1 अक्टू॰ तक
योग
हर्षण 09:50 तक
वज्रअशुभ 06:50, 1 अक्टू॰ तक
करण
बव 10:34 तक
बालव 21:25 तक
कौलव 08:16, 1 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
मेष 19:43 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:49
सूर्यास्त
18:03
चंद्रोदय
21:30
चंद्रास्त
07:53
दिनमान
12h 14m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:15 – 05:02
अभिजीत मुहूर्त
11:32 – 12:21 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:56 – 13:28
यमगंड
07:21 – 08:53
गुलिक काल
10:24 – 11:56

30 सितंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:49 – 07:21शुभ
अमृत07:21 – 08:53शुभ
काल08:53 – 10:24टालें
शुभ10:24 – 11:56शुभ
रोग11:56 – 13:28टालें
उद्वेग13:28 – 15:00टालें
चर15:00 – 16:31सामान्य
लाभ16:31 – 18:03शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:03 – 19:31टालें
शुभ19:31 – 20:59शुभ
अमृत20:59 – 22:28शुभ
चर22:28 – 23:56सामान्य
रोग23:56 – 01:24टालें
काल01:24 – 02:52टालें
लाभ02:52 – 04:20शुभ
उद्वेग04:20 – 05:48टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:4906:50दिन
चंद्र06:5007:51दिन
शनि07:5108:53दिन
गुरु08:5309:54दिन
मंगल09:5410:55दिन
सूर्य10:5511:56दिन
शुक्र11:5612:57दिन
बुध12:5713:58दिन
चंद्र13:5815:00दिन
शनि15:0016:01दिन
गुरु16:0117:02दिन
मंगल17:0218:03दिन
सूर्य18:0319:02रात
शुक्र19:0220:01रात
बुध20:0120:59रात
चंद्र20:5921:58रात
शनि21:5822:57रात
गुरु22:5723:56रात
मंगल23:5600:54रात
सूर्य00:5401:53रात
शुक्र01:5302:52रात
बुध02:5203:51रात
चंद्र03:5104:49रात
शनि04:4905:48रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
30 सित॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 अक्टू॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
7 अक्टू॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 अक्टू॰ 2026आश्विन अमावस्याअमावस्या
15 अक्टू॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
18 अक्टू॰ 2026तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
22 अक्टू॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 अक्टू॰ 2026आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
29 अक्टू॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां सुवा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2307° (लाहिड़ी)। समय सुवा (Pacific/Fiji) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।