9 अक्टूबर 2026 को सुवा का पंचांग

शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026, सुवा, फ़िजी। समय Pacific/Fiji में है।

शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को सुवा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (04:06, 10 अक्टू॰ तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (03:49, 10 अक्टू॰ तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 05:42 पर और सूर्यास्त 18:05 पर है। राहुकाल 10:20 से 11:53 तक है।

दिन और रात
दिन 05:42 – 18:05
रात 05:41 तक
तिथि
चतुर्दशी, 04:06 तक
अमावस्या
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 03:49 तक
हस्त
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 अक्टूबर 2026 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 04:06, 10 अक्टू॰ तक
अमावस्या 03:50, 11 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 03:49, 10 अक्टू॰ तक
हस्त 04:12, 11 अक्टू॰ तक
योग
शुक्ल 07:28 तक
ब्रह्म 05:51, 10 अक्टू॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 16:23 तक
शकुनि 04:06, 10 अक्टू॰ तक
चतुष्पद 15:54, 10 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 09:48 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:42
सूर्यास्त
18:05
चंद्रोदय
04:24
चंद्रास्त
16:45
दिनमान
12h 23m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:09 – 04:55
अभिजीत मुहूर्त
11:29 – 12:18

अशुभ समय

राहुकाल
10:20 – 11:53
यमगंड
14:59 – 16:32
गुलिक काल
07:15 – 08:48

9 अक्टूबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:42 – 07:15सामान्य
लाभ07:15 – 08:48शुभ
अमृत08:48 – 10:20शुभ
काल10:20 – 11:53टालें
शुभ11:53 – 13:26शुभ
रोग13:26 – 14:59टालें
उद्वेग14:59 – 16:32टालें
चर16:32 – 18:05सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:05 – 19:32टालें
काल19:32 – 20:59टालें
लाभ20:59 – 22:26शुभ
उद्वेग22:26 – 23:53टालें
शुभ23:53 – 01:20शुभ
अमृत01:20 – 02:47शुभ
चर02:47 – 04:14सामान्य
रोग04:14 – 05:41टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:4206:44दिन
बुध06:4407:46दिन
चंद्र07:4608:48दिन
शनि08:4809:49दिन
गुरु09:4910:51दिन
मंगल10:5111:53दिन
सूर्य11:5312:55दिन
शुक्र12:5513:57दिन
बुध13:5714:59दिन
चंद्र14:5916:01दिन
शनि16:0117:03दिन
गुरु17:0318:05दिन
मंगल18:0519:03रात
सूर्य19:0320:01रात
शुक्र20:0120:59रात
बुध20:5921:57रात
चंद्र21:5722:55रात
शनि22:5523:53रात
गुरु23:5300:51रात
मंगल00:5101:49रात
सूर्य01:4902:47रात
शुक्र02:4703:45रात
बुध03:4504:43रात
चंद्र04:4305:41रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 अक्टू॰ 2026आश्विन अमावस्याअमावस्या
15 अक्टू॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
18 अक्टू॰ 2026तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
22 अक्टू॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 अक्टू॰ 2026आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
29 अक्टू॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 नव॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
5 नव॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
7 नव॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां सुवा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2310° (लाहिड़ी)। समय सुवा (Pacific/Fiji) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।