20 अक्टूबर 2026 को सुवा का पंचांग

मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026, सुवा, फ़िजी। समय Pacific/Fiji में है।

मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को सुवा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (19:20 तक), नक्षत्र श्रवण (00:32, 21 अक्टू॰ तक) और योग धृति है। सूर्योदय 05:34 पर और सूर्यास्त 18:08 पर है। राहुकाल 14:59 से 16:34 तक है।

दिन और रात
दिन 05:34 – 18:08
रात 05:33 तक
तिथि
नवमी, 19:20 तक
दशमी
नक्षत्र
श्रवण, 00:32 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 अक्टूबर 2026 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल नवमी 19:20 तक
शुक्ल दशमी 20:42, 21 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 00:32, 21 अक्टू॰ तक
धनिष्ठा 02:18, 22 अक्टू॰ तक
योग
धृति 07:05 तक
शूलअशुभ 07:20, 21 अक्टू॰ तक
करण
बालव 06:25 तक
कौलव 19:20 तक
तैतिल 08:06, 21 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:34
सूर्यास्त
18:08
चंद्रोदय
12:45
चंद्रास्त
01:16
दिनमान
12h 34m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:02 – 04:48
अभिजीत मुहूर्त
11:26 – 12:16

अशुभ समय

राहुकाल
14:59 – 16:34
यमगंड
08:42 – 10:17
गुलिक काल
11:51 – 13:25

20 अक्टूबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:34 – 07:08टालें
उद्वेग07:08 – 08:42टालें
चर08:42 – 10:17सामान्य
लाभ10:17 – 11:51शुभ
अमृत11:51 – 13:25शुभ
काल13:25 – 14:59टालें
शुभ14:59 – 16:34शुभ
रोग16:34 – 18:08टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:08 – 19:34टालें
लाभ19:34 – 20:59शुभ
उद्वेग20:59 – 22:25टालें
शुभ22:25 – 23:50शुभ
अमृत23:50 – 01:16शुभ
चर01:16 – 02:42सामान्य
रोग02:42 – 04:07टालें
काल04:07 – 05:33टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:3406:37दिन
सूर्य06:3707:39दिन
शुक्र07:3908:42दिन
बुध08:4209:45दिन
चंद्र09:4510:48दिन
शनि10:4811:51दिन
गुरु11:5112:54दिन
मंगल12:5413:57दिन
सूर्य13:5714:59दिन
शुक्र14:5916:02दिन
बुध16:0217:05दिन
चंद्र17:0518:08दिन
शनि18:0819:05रात
गुरु19:0520:02रात
मंगल20:0220:59रात
सूर्य20:5921:56रात
शुक्र21:5622:53रात
बुध22:5323:50रात
चंद्र23:5000:48रात
शनि00:4801:45रात
गुरु01:4502:42रात
मंगल02:4203:39रात
सूर्य03:3904:36रात
शुक्र04:3605:33रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 अक्टू॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 अक्टू॰ 2026आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
29 अक्टू॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 नव॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
5 नव॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
7 नव॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
9 नव॰ 2026कार्तिक अमावस्याअमावस्या
13 नव॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 नव॰ 2026वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

तिथियां सुवा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2314° (लाहिड़ी)। समय सुवा (Pacific/Fiji) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।