24 नवंबर 2026 को सुवा का पंचांग

मंगलवार, 24 नवंबर 2026, सुवा, फ़िजी। समय Pacific/Fiji में है।

मंगलवार, 24 नवंबर 2026 को सुवा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (06:12 तक), नक्षत्र भरणी (08:32 तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 05:20 पर और सूर्यास्त 18:24 पर है। राहुकाल 15:08 से 16:46 तक है।

दिन और रात
दिन 05:20 – 18:24
रात 05:20 तक
तिथि
पूर्णिमा, 02:53 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
भरणी, 08:32 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

24 नवंबर 2026 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 06:12 तक
पूर्णिमा 02:53, 25 नव॰ तक
कृष्ण प्रतिपदा 23:20, 25 नव॰ तक
नक्षत्र
भरणी 08:32 तक
कृत्तिका 05:55, 25 नव॰ तक
योग
परिघअशुभ 22:35 तक
शिव 18:29, 25 नव॰ तक
करण
वणिज 06:12 तक
विष्टि (भद्रा) 16:35 तक
बव 02:53, 25 नव॰ तक
बालव 13:08, 25 नव॰ तक
चंद्र राशि
मेष 13:54 तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:20
सूर्यास्त
18:24
चंद्रोदय
18:01
चंद्रास्त
04:21
दिनमान
13h 4m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:53 – 04:37
अभिजीत मुहूर्त
11:26 – 12:19

अशुभ समय

राहुकाल
15:08 – 16:46
यमगंड
08:36 – 10:14
गुलिक काल
11:52 – 13:30

24 नवंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:20 – 06:58टालें
उद्वेग06:58 – 08:36टालें
चर08:36 – 10:14सामान्य
लाभ10:14 – 11:52शुभ
अमृत11:52 – 13:30शुभ
काल13:30 – 15:08टालें
शुभ15:08 – 16:46शुभ
रोग16:46 – 18:24टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:24 – 19:46टालें
लाभ19:46 – 21:08शुभ
उद्वेग21:08 – 22:30टालें
शुभ22:30 – 23:52शुभ
अमृत23:52 – 01:14शुभ
चर01:14 – 02:36सामान्य
रोग02:36 – 03:58टालें
काल03:58 – 05:20टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:2006:26दिन
सूर्य06:2607:31दिन
शुक्र07:3108:36दिन
बुध08:3609:42दिन
चंद्र09:4210:47दिन
शनि10:4711:52दिन
गुरु11:5212:58दिन
मंगल12:5814:03दिन
सूर्य14:0315:08दिन
शुक्र15:0816:14दिन
बुध16:1417:19दिन
चंद्र17:1918:24दिन
शनि18:2419:19रात
गुरु19:1920:14रात
मंगल20:1421:08रात
सूर्य21:0822:03रात
शुक्र22:0322:58रात
बुध22:5823:52रात
चंद्र23:5200:47रात
शनि00:4701:42रात
गुरु01:4202:36रात
मंगल02:3603:31रात
सूर्य03:3104:26रात
शुक्र04:2605:20रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
24 नव॰ 2026कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
28 नव॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
2 दिस॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
5 दिस॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
7 दिस॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
9 दिस॰ 2026मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
13 दिस॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 दिस॰ 2026धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
20 दिस॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 दिस॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां सुवा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2328° (लाहिड़ी)। समय सुवा (Pacific/Fiji) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।