14 मार्च 2027 को सुवा का पंचांग

रविवार, 14 मार्च 2027, सुवा, फ़िजी। समय Pacific/Fiji में है।

रविवार, 14 मार्च 2027 को सुवा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (19:02 तक), नक्षत्र कृत्तिका (16:53 तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 06:08 पर और सूर्यास्त 18:22 पर है। राहुकाल 16:50 से 18:22 तक है।

दिन और रात
दिन 06:08 – 18:22
रात 06:08 तक
तिथि
षष्ठी, 19:02 तक
सप्तमी
नक्षत्र
कृत्तिका, 16:53 तक
रोहिणी
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 मार्च 2027 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 19:02 तक
शुक्ल सप्तमी 17:21, 15 मार्च तक
नक्षत्र
रोहिणी 15:56, 15 मार्च तक
योग
विष्कंभअशुभ 23:40 तक
प्रीति 21:07, 15 मार्च तक
करण
कौलव 07:46 तक
तैतिल 19:02 तक
गर 06:14, 15 मार्च तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:08
सूर्यास्त
18:22
चंद्रोदय
11:07
चंद्रास्त
22:19
दिनमान
12h 14m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:34 – 05:21
अभिजीत मुहूर्त
11:51 – 12:40

अशुभ समय

राहुकाल
16:50 – 18:22
यमगंड
12:15 – 13:47
गुलिक काल
15:19 – 16:50

14 मार्च 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:08 – 07:40टालें
चर07:40 – 09:12सामान्य
लाभ09:12 – 10:43शुभ
अमृत10:43 – 12:15शुभ
काल12:15 – 13:47टालें
शुभ13:47 – 15:19शुभ
रोग15:19 – 16:50टालें
उद्वेग16:50 – 18:22टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:22 – 19:50शुभ
अमृत19:50 – 21:19शुभ
चर21:19 – 22:47सामान्य
रोग22:47 – 00:15टालें
काल00:15 – 01:43टालें
लाभ01:43 – 03:12शुभ
उद्वेग03:12 – 04:40टालें
शुभ04:40 – 06:08शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:0807:09दिन
शुक्र07:0908:10दिन
बुध08:1009:12दिन
चंद्र09:1210:13दिन
शनि10:1311:14दिन
गुरु11:1412:15दिन
मंगल12:1513:16दिन
सूर्य13:1614:17दिन
शुक्र14:1715:19दिन
बुध15:1916:20दिन
चंद्र16:2017:21दिन
शनि17:2118:22दिन
गुरु18:2219:21रात
मंगल19:2120:20रात
सूर्य20:2021:19रात
शुक्र21:1922:17रात
बुध22:1723:16रात
चंद्र23:1600:15रात
शनि00:1501:14रात
गुरु01:1402:13रात
मंगल02:1303:12रात
सूर्य03:1204:11रात
शुक्र04:1105:09रात
बुध05:0906:08रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
15 मार्च 2027मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
19 मार्च 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 मार्च 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 मार्च 2027फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
26 मार्च 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
30 मार्च 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 अप्रैल 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
5 अप्रैल 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 अप्रैल 2027चैत्र अमावस्याअमावस्या
10 अप्रैल 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां सुवा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2370° (लाहिड़ी)। समय सुवा (Pacific/Fiji) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।