24 सितंबर 2027 को सुवा का पंचांग

शुक्रवार, 24 सितंबर 2027, सुवा, फ़िजी। समय Pacific/Fiji में है।

शुक्रवार, 24 सितंबर 2027 को सुवा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (09:27 तक), नक्षत्र आर्द्रा (22:28 तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 05:54 पर और सूर्यास्त 18:02 पर है। राहुकाल 10:27 से 11:58 तक है।

दिन और रात
दिन 05:54 – 18:02
रात 05:54 तक
तिथि
अष्टमी, 09:27 तक
नवमी
नक्षत्र
आर्द्रा, 22:28 तक
पुनर्वसु
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

24 सितंबर 2027 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 09:27 तक
कृष्ण नवमी 07:25, 25 सित॰ तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 20:57, 25 सित॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 06:05 तक
वरीयान 03:22, 25 सित॰ तक
परिघअशुभ 00:21, 26 सित॰ तक
करण
कौलव 09:27 तक
तैतिल 20:29 तक
गर 07:25, 25 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:54
सूर्यास्त
18:02
चंद्रोदय
00:43
चंद्रास्त
11:54
दिनमान
12h 8m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:19 – 05:07
अभिजीत मुहूर्त
11:34 – 12:22

अशुभ समय

राहुकाल
10:27 – 11:58
यमगंड
15:00 – 16:31
गुलिक काल
07:25 – 08:56

24 सितंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:54 – 07:25सामान्य
लाभ07:25 – 08:56शुभ
अमृत08:56 – 10:27शुभ
काल10:27 – 11:58टालें
शुभ11:58 – 13:29शुभ
रोग13:29 – 15:00टालें
उद्वेग15:00 – 16:31टालें
चर16:31 – 18:02सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:02 – 19:31टालें
काल19:31 – 21:00टालें
लाभ21:00 – 22:29शुभ
उद्वेग22:29 – 23:58टालें
शुभ23:58 – 01:27शुभ
अमृत01:27 – 02:56शुभ
चर02:56 – 04:25सामान्य
रोग04:25 – 05:54टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:5406:55दिन
बुध06:5507:56दिन
चंद्र07:5608:56दिन
शनि08:5609:57दिन
गुरु09:5710:58दिन
मंगल10:5811:58दिन
सूर्य11:5812:59दिन
शुक्र12:5913:59दिन
बुध13:5915:00दिन
चंद्र15:0016:01दिन
शनि16:0117:01दिन
गुरु17:0118:02दिन
मंगल18:0219:01रात
सूर्य19:0120:01रात
शुक्र20:0121:00रात
बुध21:0021:59रात
चंद्र21:5922:58रात
शनि22:5823:58रात
गुरु23:5800:57रात
मंगल00:5701:56रात
सूर्य01:5602:56रात
शुक्र02:5603:55रात
बुध03:5504:54रात
चंद्र04:5405:54रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
24 सित॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 सित॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
28 सित॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
30 सित॰ 2027आश्विन अमावस्याअमावस्या
4 अक्टू॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
11 अक्टू॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 अक्टू॰ 2027आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
18 अक्टू॰ 2027तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 अक्टू॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां सुवा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2444° (लाहिड़ी)। समय सुवा (Pacific/Fiji) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।