25 सितंबर 2027 को सुवा का पंचांग

शनिवार, 25 सितंबर 2027, सुवा, फ़िजी। समय Pacific/Fiji में है।

शनिवार, 25 सितंबर 2027 को सुवा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण नवमी (07:25 तक), नक्षत्र पुनर्वसु (20:57 तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 05:54 पर और सूर्यास्त 18:02 पर है। राहुकाल 08:56 से 10:27 तक है।

दिन और रात
दिन 05:54 – 18:02
रात 05:53 तक
तिथि
दशमी, 05:01 तक
नक्षत्र
पुनर्वसु, 20:57 तक
पुष्य
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 सितंबर 2027 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण नवमी 07:25 तक
कृष्ण दशमी 05:01, 26 सित॰ तक
कृष्ण एकादशी 02:19, 27 सित॰ तक
नक्षत्र
पुष्य 19:08, 26 सित॰ तक
योग
परिघअशुभ 00:21, 26 सित॰ तक
शिव 21:05, 26 सित॰ तक
करण
गर 07:25 तक
वणिज 18:15 तक
विष्टि (भद्रा) 05:01, 26 सित॰ तक
बव 15:42, 26 सित॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 15:22 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:54
सूर्यास्त
18:02
चंद्रोदय
01:39
चंद्रास्त
12:58
दिनमान
12h 9m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:19 – 05:06
अभिजीत मुहूर्त
11:34 – 12:22

अशुभ समय

राहुकाल
08:56 – 10:27
यमगंड
13:29 – 15:00
गुलिक काल
05:54 – 07:25

25 सितंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:54 – 07:25टालें
शुभ07:25 – 08:56शुभ
रोग08:56 – 10:27टालें
उद्वेग10:27 – 11:58टालें
चर11:58 – 13:29सामान्य
लाभ13:29 – 15:00शुभ
अमृत15:00 – 16:31शुभ
काल16:31 – 18:02टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:02 – 19:31शुभ
उद्वेग19:31 – 21:00टालें
शुभ21:00 – 22:29शुभ
अमृत22:29 – 23:57शुभ
चर23:57 – 01:26सामान्य
रोग01:26 – 02:55टालें
काल02:55 – 04:24टालें
लाभ04:24 – 05:53शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:5406:54दिन
गुरु06:5407:55दिन
मंगल07:5508:56दिन
सूर्य08:5609:56दिन
शुक्र09:5610:57दिन
बुध10:5711:58दिन
चंद्र11:5812:59दिन
शनि12:5913:59दिन
गुरु13:5915:00दिन
मंगल15:0016:01दिन
सूर्य16:0117:01दिन
शुक्र17:0118:02दिन
बुध18:0219:01रात
चंद्र19:0120:01रात
शनि20:0121:00रात
गुरु21:0021:59रात
मंगल21:5922:58रात
सूर्य22:5823:57रात
शुक्र23:5700:57रात
बुध00:5701:56रात
चंद्र01:5602:55रात
शनि02:5503:54रात
गुरु03:5404:53रात
मंगल04:5305:53रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
26 सित॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
28 सित॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
30 सित॰ 2027आश्विन अमावस्याअमावस्या
4 अक्टू॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
11 अक्टू॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 अक्टू॰ 2027आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
18 अक्टू॰ 2027तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 अक्टू॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां सुवा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2444° (लाहिड़ी)। समय सुवा (Pacific/Fiji) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।