4 नवंबर 2027 को सुवा का पंचांग

गुरुवार, 4 नवंबर 2027, सुवा, फ़िजी। समय Pacific/Fiji में है।

गुरुवार, 4 नवंबर 2027 को सुवा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (04:08, 5 नव॰ तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (21:55 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 05:25 पर और सूर्यास्त 18:14 पर है। राहुकाल 13:26 से 15:02 तक है।

दिन और रात
दिन 05:25 – 18:14
रात 05:25 तक
तिथि
षष्ठी, 04:08 तक
सप्तमी
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 21:55 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 नवंबर 2027 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 04:08, 5 नव॰ तक
शुक्ल सप्तमी 06:39, 6 नव॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 00:49, 6 नव॰ तक
योग
धृति 02:32, 5 नव॰ तक
शूलअशुभ 03:24, 6 नव॰ तक
करण
कौलव 15:01 तक
तैतिल 04:08, 5 नव॰ तक
गर 17:21, 5 नव॰ तक
चंद्र राशि
धनु 04:37, 5 नव॰ तक
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:25
सूर्यास्त
18:14
चंद्रोदय
09:46
चंद्रास्त
23:18
दिनमान
12h 48m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:56 – 04:41
अभिजीत मुहूर्त
11:24 – 12:15

अशुभ समय

राहुकाल
13:26 – 15:02
यमगंड
05:25 – 07:01
गुलिक काल
08:37 – 10:13

4 नवंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:25 – 07:01शुभ
रोग07:01 – 08:37टालें
उद्वेग08:37 – 10:13टालें
चर10:13 – 11:49सामान्य
लाभ11:49 – 13:26शुभ
अमृत13:26 – 15:02शुभ
काल15:02 – 16:38टालें
शुभ16:38 – 18:14शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:14 – 19:38शुभ
चर19:38 – 21:01सामान्य
रोग21:01 – 22:25टालें
काल22:25 – 23:49टालें
लाभ23:49 – 01:13शुभ
उद्वेग01:13 – 02:37टालें
शुभ02:37 – 04:01शुभ
अमृत04:01 – 05:25शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:2506:29दिन
मंगल06:2907:33दिन
सूर्य07:3308:37दिन
शुक्र08:3709:41दिन
बुध09:4110:45दिन
चंद्र10:4511:49दिन
शनि11:4912:53दिन
गुरु12:5313:58दिन
मंगल13:5815:02दिन
सूर्य15:0216:06दिन
शुक्र16:0617:10दिन
बुध17:1018:14दिन
चंद्र18:1419:10रात
शनि19:1020:05रात
गुरु20:0521:01रात
मंगल21:0121:57रात
सूर्य21:5722:53रात
शुक्र22:5323:49रात
बुध23:4900:45रात
चंद्र00:4501:41रात
शनि01:4102:37रात
गुरु02:3703:33रात
मंगल03:3304:29रात
सूर्य04:2905:25रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 नव॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 नव॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 नव॰ 2027कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
17 नव॰ 2027वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 नव॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 नव॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 नव॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
28 नव॰ 2027मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
2 दिस॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां सुवा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2460° (लाहिड़ी)। समय सुवा (Pacific/Fiji) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।