15 नवंबर 2027 को सुवा का पंचांग

सोमवार, 15 नवंबर 2027, सुवा, फ़िजी। समय Pacific/Fiji में है।

सोमवार, 15 नवंबर 2027 को सुवा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (13:58 तक), नक्षत्र कृत्तिका (13:36 तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 05:22 पर और सूर्यास्त 18:19 पर है। राहुकाल 06:59 से 08:36 तक है।

दिन और रात
दिन 05:22 – 18:19
रात 05:21 तक
तिथि
प्रतिपदा, 13:58 तक
द्वितीया
नक्षत्र
कृत्तिका, 13:36 तक
रोहिणी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 नवंबर 2027 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 13:58 तक
कृष्ण द्वितीया 12:11, 16 नव॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 12:30, 16 नव॰ तक
योग
परिघअशुभ 21:51 तक
शिव 19:09, 16 नव॰ तक
करण
कौलव 13:58 तक
तैतिल 01:07, 16 नव॰ तक
गर 12:11, 16 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:22
सूर्यास्त
18:19
चंद्रोदय
19:27
चंद्रास्त
05:42
दिनमान
12h 57m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:53 – 04:37
अभिजीत मुहूर्त
11:24 – 12:16

अशुभ समय

राहुकाल
06:59 – 08:36
यमगंड
10:13 – 11:50
गुलिक काल
13:28 – 15:05

15 नवंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:22 – 06:59शुभ
काल06:59 – 08:36टालें
शुभ08:36 – 10:13शुभ
रोग10:13 – 11:50टालें
उद्वेग11:50 – 13:28टालें
चर13:28 – 15:05सामान्य
लाभ15:05 – 16:42शुभ
अमृत16:42 – 18:19शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:19 – 19:42सामान्य
रोग19:42 – 21:05टालें
काल21:05 – 22:27टालें
लाभ22:27 – 23:50शुभ
उद्वेग23:50 – 01:13टालें
शुभ01:13 – 02:36शुभ
अमृत02:36 – 03:59शुभ
चर03:59 – 05:21सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:2206:26दिन
शनि06:2607:31दिन
गुरु07:3108:36दिन
मंगल08:3609:41दिन
सूर्य09:4110:46दिन
शुक्र10:4611:50दिन
बुध11:5012:55दिन
चंद्र12:5514:00दिन
शनि14:0015:05दिन
गुरु15:0516:10दिन
मंगल16:1017:14दिन
सूर्य17:1418:19दिन
शुक्र18:1919:14रात
बुध19:1420:09रात
चंद्र20:0921:05रात
शनि21:0522:00रात
गुरु22:0022:55रात
मंगल22:5523:50रात
सूर्य23:5000:45रात
शुक्र00:4501:41रात
बुध01:4102:36रात
चंद्र02:3603:31रात
शनि03:3104:26रात
गुरु04:2605:21रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 नव॰ 2027वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 नव॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 नव॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 नव॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
28 नव॰ 2027मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
2 दिस॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 दिस॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 दिस॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 दिस॰ 2027मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां सुवा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2464° (लाहिड़ी)। समय सुवा (Pacific/Fiji) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।