4 फ़रवरी 2028 को सुवा का पंचांग

शुक्रवार, 4 फ़रवरी 2028, सुवा, फ़िजी। समय Pacific/Fiji में है।

शुक्रवार, 4 फ़रवरी 2028 को सुवा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (19:17 तक), नक्षत्र भरणी (19:09 तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 05:54 पर और सूर्यास्त 18:45 पर है। राहुकाल 10:43 से 12:19 तक है।

दिन और रात
दिन 05:54 – 18:45
रात 05:54 तक
तिथि
अष्टमी, 19:17 तक
नवमी
नक्षत्र
भरणी, 19:09 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 फ़रवरी 2028 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 19:17 तक
शुक्ल नवमी 18:56, 5 फ़र॰ तक
नक्षत्र
भरणी 19:09 तक
कृत्तिका 19:25, 5 फ़र॰ तक
योग
शुक्ल 23:36 तक
ब्रह्म 22:02, 5 फ़र॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 07:10 तक
बव 19:17 तक
बालव 07:13, 5 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
मेष 01:18, 5 फ़र॰ तक
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:54
सूर्यास्त
18:45
चंद्रोदय
12:35
चंद्रास्त
23:55
दिनमान
12h 52m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:25 – 05:09
अभिजीत मुहूर्त
11:54 – 12:45

अशुभ समय

राहुकाल
10:43 – 12:19
यमगंड
15:32 – 17:09
गुलिक काल
07:30 – 09:07

4 फ़रवरी 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:54 – 07:30सामान्य
लाभ07:30 – 09:07शुभ
अमृत09:07 – 10:43शुभ
काल10:43 – 12:19टालें
शुभ12:19 – 13:56शुभ
रोग13:56 – 15:32टालें
उद्वेग15:32 – 17:09टालें
चर17:09 – 18:45सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:45 – 20:09टालें
काल20:09 – 21:33टालें
लाभ21:33 – 22:56शुभ
उद्वेग22:56 – 00:20टालें
शुभ00:20 – 01:43शुभ
अमृत01:43 – 03:07शुभ
चर03:07 – 04:31सामान्य
रोग04:31 – 05:54टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:5406:58दिन
बुध06:5808:02दिन
चंद्र08:0209:07दिन
शनि09:0710:11दिन
गुरु10:1111:15दिन
मंगल11:1512:19दिन
सूर्य12:1913:24दिन
शुक्र13:2414:28दिन
बुध14:2815:32दिन
चंद्र15:3216:37दिन
शनि16:3717:41दिन
गुरु17:4118:45दिन
मंगल18:4519:41रात
सूर्य19:4120:37रात
शुक्र20:3721:33रात
बुध21:3322:28रात
चंद्र22:2823:24रात
शनि23:2400:20रात
गुरु00:2001:15रात
मंगल01:1502:11रात
सूर्य02:1103:07रात
शुक्र03:0704:03रात
बुध04:0304:58रात
चंद्र04:5805:54रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
7 फ़र॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
9 फ़र॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 फ़र॰ 2028माघ पूर्णिमापूर्णिमा
13 फ़र॰ 2028कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
14 फ़र॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
18 फ़र॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 फ़र॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 फ़र॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
25 फ़र॰ 2028फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
29 फ़र॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां सुवा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2495° (लाहिड़ी)। समय सुवा (Pacific/Fiji) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।