28 सितंबर 2028 को सुवा का पंचांग

गुरुवार, 28 सितंबर 2028, सुवा, फ़िजी। समय Pacific/Fiji में है।

गुरुवार, 28 सितंबर 2028 को सुवा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल दशमी (16:25 तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (13:48 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 05:50 पर और सूर्यास्त 18:03 पर है। राहुकाल 13:28 से 15:00 तक है।

दिन और रात
दिन 05:50 – 18:03
रात 05:49 तक
तिथि
दशमी, 16:25 तक
एकादशी
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा, 13:48 तक
श्रवण
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 सितंबर 2028 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल दशमी 16:25 तक
शुक्ल एकादशी 18:37, 29 सित॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 16:30, 29 सित॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 11:34 तक
सुकर्मा 12:13, 29 सित॰ तक
करण
गर 16:25 तक
वणिज 05:29, 29 सित॰ तक
विष्टि (भद्रा) 18:37, 29 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:50
सूर्यास्त
18:03
चंद्रोदय
13:37
चंद्रास्त
02:06
दिनमान
12h 12m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:16 – 05:03
अभिजीत मुहूर्त
11:32 – 12:21

अशुभ समय

राहुकाल
13:28 – 15:00
यमगंड
05:50 – 07:22
गुलिक काल
08:53 – 10:25

28 सितंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:50 – 07:22शुभ
रोग07:22 – 08:53टालें
उद्वेग08:53 – 10:25टालें
चर10:25 – 11:57सामान्य
लाभ11:57 – 13:28शुभ
अमृत13:28 – 15:00शुभ
काल15:00 – 16:31टालें
शुभ16:31 – 18:03शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:03 – 19:31शुभ
चर19:31 – 20:59सामान्य
रोग20:59 – 22:28टालें
काल22:28 – 23:56टालें
लाभ23:56 – 01:24शुभ
उद्वेग01:24 – 02:53टालें
शुभ02:53 – 04:21शुभ
अमृत04:21 – 05:49शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:5006:51दिन
मंगल06:5107:52दिन
सूर्य07:5208:53दिन
शुक्र08:5309:54दिन
बुध09:5410:56दिन
चंद्र10:5611:57दिन
शनि11:5712:58दिन
गुरु12:5813:59दिन
मंगल13:5915:00दिन
सूर्य15:0016:01दिन
शुक्र16:0117:02दिन
बुध17:0218:03दिन
चंद्र18:0319:02रात
शनि19:0220:01रात
गुरु20:0120:59रात
मंगल20:5921:58रात
सूर्य21:5822:57रात
शुक्र22:5723:56रात
बुध23:5600:55रात
चंद्र00:5501:54रात
शनि01:5402:53रात
गुरु02:5303:52रात
मंगल03:5204:51रात
सूर्य04:5105:49रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 सित॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 अक्टू॰ 2028आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
8 अक्टू॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 अक्टू॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 अक्टू॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 अक्टू॰ 2028तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2028कार्तिक अमावस्याअमावस्या
21 अक्टू॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां सुवा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2585° (लाहिड़ी)। समय सुवा (Pacific/Fiji) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।