24 अक्टूबर 2028 को सुवा का पंचांग

मंगलवार, 24 अक्टूबर 2028, सुवा, फ़िजी। समय Pacific/Fiji में है।

मंगलवार, 24 अक्टूबर 2028 को सुवा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (04:11, 25 अक्टू॰ तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (18:52 तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 05:31 पर और सूर्यास्त 18:09 पर है। राहुकाल 15:00 से 16:35 तक है।

दिन और रात
दिन 05:31 – 18:09
रात 05:30 तक
तिथि
सप्तमी, 04:11 तक
अष्टमी
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा, 18:52 तक
उत्तराषाढ़ा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

24 अक्टूबर 2028 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 04:11, 25 अक्टू॰ तक
शुक्ल अष्टमी 05:44, 26 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 20:42, 25 अक्टू॰ तक
योग
सुकर्मा 18:02 तक
धृति 17:55, 25 अक्टू॰ तक
करण
गर 15:41 तक
वणिज 04:11, 25 अक्टू॰ तक
विष्टि (भद्रा) 16:53, 25 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
धनु 01:15, 25 अक्टू॰ तक
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:31
सूर्यास्त
18:09
चंद्रोदय
10:36
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
12h 39m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:00 – 04:45
अभिजीत मुहूर्त
11:25 – 12:15

अशुभ समय

राहुकाल
15:00 – 16:35
यमगंड
08:40 – 10:15
गुलिक काल
11:50 – 13:25

24 अक्टूबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:31 – 07:06टालें
उद्वेग07:06 – 08:40टालें
चर08:40 – 10:15सामान्य
लाभ10:15 – 11:50शुभ
अमृत11:50 – 13:25शुभ
काल13:25 – 15:00टालें
शुभ15:00 – 16:35शुभ
रोग16:35 – 18:09टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:09 – 19:35टालें
लाभ19:35 – 21:00शुभ
उद्वेग21:00 – 22:25टालें
शुभ22:25 – 23:50शुभ
अमृत23:50 – 01:15शुभ
चर01:15 – 02:40सामान्य
रोग02:40 – 04:05टालें
काल04:05 – 05:30टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:3106:34दिन
सूर्य06:3407:37दिन
शुक्र07:3708:40दिन
बुध08:4009:44दिन
चंद्र09:4410:47दिन
शनि10:4711:50दिन
गुरु11:5012:53दिन
मंगल12:5313:57दिन
सूर्य13:5715:00दिन
शुक्र15:0016:03दिन
बुध16:0317:06दिन
चंद्र17:0618:09दिन
शनि18:0919:06रात
गुरु19:0620:03रात
मंगल20:0321:00रात
सूर्य21:0021:56रात
शुक्र21:5622:53रात
बुध22:5323:50रात
चंद्र23:5000:47रात
शनि00:4701:43रात
गुरु01:4302:40रात
मंगल02:4003:37रात
सूर्य03:3704:33रात
शुक्र04:3305:30रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 अक्टू॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 नव॰ 2028कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
6 नव॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 नव॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 नव॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
15 नव॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
16 नव॰ 2028मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
16 नव॰ 2028वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
20 नव॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां सुवा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2595° (लाहिड़ी)। समय सुवा (Pacific/Fiji) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।